Kabir Ke Dohe (कबीर के दोहे) Class 8 | Summary & NCERT Question Answer
मुख्य विषय: गुरु का महत्व, सत्य, मधुर वाणी, संतुलन, संगति, आलोचना से सीख और विवेक।

कबीर के दोहे पाठ का सारांश
इस पाठ में कबीर के ऐसे दोहे संकलित हैं जो जीवन को सही दिशा देने वाली व्यावहारिक सीख देते हैं। कबीर के अनुसार गुरु का स्थान बहुत ऊँचा है, क्योंकि गुरु ही हमें ज्ञान देकर ईश्वर और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। वे जीवन में किसी भी बात की अति से बचने और संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।
कबीर बताते हैं कि मनुष्य की महानता केवल पद, धन या ऊँचाई से नहीं होती; सच्चा बड़ा वही है जो दूसरों के काम आए। मधुर वाणी स्वयं को और दूसरों को शांति देती है। सत्य सबसे बड़ी साधना है, जबकि झूठ से बचना चाहिए। अच्छी संगति हमारे विचार और व्यवहार को अच्छा बनाती है। उचित आलोचना हमें अपनी गलतियाँ पहचानने में सहायता करती है और विवेकशील व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करके व्यर्थ बातों को छोड़ देता है।
कबीर के दोहे – NCERT प्रश्नोत्तर
यहाँ इस लेख में आपके किताब के पाठ 5 कबीर के दोहे का सभी प्रश्नों का उत्तर दिए गया है। आप आप आसानी से सभी प्रश्नों का उत्तर पढ़कर समझ सकेंगे।
1. मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।”
इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?
(ख) गुरु का महत्व
(ग) ज्ञान का महत्व
(घ) भक्ति का महत्व
उत्तर: ★ (ख) गुरु का महत्व
★ (ग) ज्ञान का महत्व
कारण: गुरु हमें ज्ञान देकर गोविंद की पहचान कराते हैं, इसलिए दोनों उत्तर उपयुक्त हैं।
(2) “अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”
इस दोहे का मूल संदेश क्या है?
(ख) बारिश और धूप से बचना चाहिए।
(ग) हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
(घ) हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए।
उत्तर: ★ (ग) हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
कारण: दोहे में बोलने, चुप रहने, वर्षा और धूप—सभी की अति से बचने की सीख है।
(3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।”
यह दोहा किस जीवन-कौशल को विकसित करने पर बल देता है?
(ख) दूसरों के काम आना
(ग) परिश्रम और लगन से काम करना
(घ) सभी के प्रति उदार रहना
उत्तर: ★ (ख) दूसरों के काम आना
★ (घ) सभी के प्रति उदार रहना
कारण: खजूर के उदाहरण से बताया गया है कि बड़ा होकर भी यदि हम दूसरों के काम न आएँ तो वह बड़प्पन अधूरा है।
(4) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।”
इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
(ख) दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।
(ग) किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है।
(घ) सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है।
उत्तर: ★ (ख) दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।
कारण: मधुर वाणी सामने वाले के साथ हमारे अपने मन को भी शांत करती है।
(5) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप।।”
इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(ख) सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
(ग) बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं।
(घ) सत्य महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य है, जिससे हृदय प्रकाशित होता है।
उत्तर: ★ (ख) सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है।
★ (घ) सत्य महत्वपूर्ण जीवन-मूल्य है, जिससे हृदय प्रकाशित होता है।
कारण: दोहे में सत्य को तप के समान और झूठ को पाप के समान बताया गया है।
(6) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।”
यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?
(ख) आलोचकों को दूर रखना चाहिए।
(ग) आलोचकों को पास रखना चाहिए।
(घ) आलोचकों की निंदा करनी चाहिए।
उत्तर: ★ (ग) आलोचकों को पास रखना चाहिए।
कारण: उचित आलोचना हमारी कमियाँ बताकर सुधार का अवसर देती है।
(7) "साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय।।” इस दोहे में 'सूप' किसका प्रतीक है?
सुख-सुविधाओं का
विवेक और सूझबूझ का
कठोर और क्रोधी स्वभाव का
उत्तर: ★ विवेक और सूझबूझ का
कारण: सूप की तरह विवेकशील व्यक्ति सार्थक बात ग्रहण करता है और व्यर्थ बात छोड़ देता है।
हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
उत्तर: अपने चुने हुए उत्तर का कारण दोहे के भाव के आधार पर बताइए। अलग उत्तर तभी उचित होगा जब उसका तर्क पाठ की पंक्तियों से स्पष्ट रूप से जुड़ता हो।
2. मिलकर करें मिलान
(क)
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | 1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | 3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है। |
| 5. | साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए, जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके। |
| 7. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है। |
| 8. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं। |
सही मिलान: 1 → 3, 2 → 5, 3 → 6, 4 → 8, 5 → 7, 6 → 4, 7 → 1, 8 → 2
(ख)
नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए—
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | 1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 2. औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | 3. जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप।। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 4. सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।। |
| 5. | साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।। |
| 7. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 7. जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।। |
| 8. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।। |
सही मिलान: 1 → 8, 2 → 6, 3 → 2, 4 → 1, 5 → 4, 6 → 7, 7 → 5, 8 → 3
3. पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”
उत्तर: कबीर मन को पक्षी की तरह चंचल बताते हैं। मन जहाँ चाहता है, वहाँ चला जाता है। जिस प्रकार की संगति में मनुष्य रहता है, उसका प्रभाव उसके विचार, आदत और व्यवहार पर पड़ता है। इसलिए अच्छी संगति चुनना आवश्यक है।
(ख) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप।।”
उत्तर: कबीर सत्य को सबसे बड़ी तपस्या और झूठ को सबसे बड़ा पाप बताते हैं। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य है, वहाँ ईश्वर का वास माना गया है। इसलिए मनुष्य को कठिन परिस्थिति में भी सत्य का साथ देना चाहिए।
4. सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस भाव से सहमत हूँ। गुरु हमें ज्ञान देते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं। कबीर के अनुसार गुरु का महत्व इसलिए विशेष है क्योंकि गुरु ही हमें गोविंद अर्थात ईश्वर की पहचान कराते हैं।
(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।
उत्तर: मनुष्य में विनम्रता, दया, उदारता, सहयोग, जिम्मेदारी और दूसरों के काम आने की भावना होनी चाहिए। केवल धन या ऊँचा पद किसी को महान नहीं बनाता। सच्ची महानता उपयोगी और अच्छा मनुष्य बनने में है।
(ग) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं, स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: हाँ, शब्दों का प्रभाव दोनों पर पड़ता है। गुस्से में कठोर शब्द बोलने से सामने वाला दुखी होता है और हमारा मन भी अशांत रहता है। शांत और मधुर शब्द बोलने से तनाव कम होता है और बातचीत का वातावरण अच्छा बनता है।
(ङ) “जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: संगति हमारे विचारों और कार्यों को प्रभावित करती है। मेहनती और अनुशासित मित्रों के साथ रहने से अच्छी आदतें बनती हैं, जबकि गलत संगति बुरी आदतों की ओर ले जा सकती है। इसलिए हमें सोच-समझकर मित्र और संगति चुननी चाहिए।
5. दोहे की रचना
“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे— दोहों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक-समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें—
(1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे— राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
उत्तर: “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” — यहाँ ‘बराबर’ शब्द की पुनरावृत्ति से ध्वनि-सौंदर्य बनता है।
(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (जैसे— बार-बार)
उत्तर: “सार-सार को गहि रहै...” — ‘सार’ शब्द एक साथ दो बार आया है।
(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे— जल, जाल), एक ही पंक्ति में आए हैं।
उत्तर: “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” तथा “अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।” में ‘भला–भली’ लगभग समान शब्द हैं जिनमें मात्रा का अंतर है।
(4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों (जैसे— अच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
उत्तर: “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” — ‘साँच’ और ‘झूठ’ विपरीतार्थक शब्द हैं।
(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है। (जैसे— दूध जैसा सफेद)
उत्तर: “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” तथा “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” में तुलना की गई है।
(6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (जैसे— मुख चंद्र है)
उत्तर: “कबिरा मन पंछी भया...” — यहाँ मन को ‘पंछी’ कहा गया है।
(7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (जैसे— ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप’)
उत्तर: “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” — ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप’ लिखा गया है।
(8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
उत्तर: “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” में खजूर का उदाहरण देकर समझाया गया है कि केवल बड़ा होना पर्याप्त नहीं, दूसरों के काम आना भी जरूरी है।
अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: अपने समूह की बनाई सूची को उदाहरणों के साथ कक्षा में साझा कीजिए।
6. अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।”
• यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?
उत्तर: मैं पहले गुरु को प्रणाम करता, क्योंकि गुरु ही ज्ञान देकर ईश्वर की पहचान और सही मार्ग बताते हैं। साथ ही मैं ईश्वर के प्रति भी श्रद्धा रखता।
• यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
उत्तर: गुरु या शिक्षक न होते तो ज्ञान को व्यवस्थित ढंग से सीखना कठिन होता। हमें सही दिशा, अनुशासन, अनुभव और गलतियों को सुधारने का मार्गदर्शन कम मिलता।
(ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।”
• यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: बहुत अधिक बोलने से व्यक्ति दूसरों को सुन नहीं पाता और गलत बात कह सकता है। बहुत चुप रहने से वह अपने विचार या समस्या व्यक्त नहीं कर पाता। इसलिए संतुलित बोलना उचित है।
• यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: बहुत अधिक वर्षा से बाढ़ और फसलों का नुकसान हो सकता है, जबकि कम वर्षा से सूखा और पानी की कमी हो सकती है। इसलिए पर्याप्त और संतुलित वर्षा आवश्यक है।
• आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया से पढ़ाई में ध्यान कम हो सकता है, समय नष्ट हो सकता है और नींद व दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। इसका सीमित और उपयोगी प्रयोग करना चाहिए।
(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”
• झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: झूठ बोलने से लोगों का विश्वास टूट सकता है और एक झूठ छिपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ सकते हैं। इससे तनाव और परेशानी बढ़ती है। सत्य से विश्वास और आत्मसम्मान बना रहता है।
• कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं। ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर: मैं शिक्षक को विनम्रता से बताऊँगा कि मेरा उत्तर गलत था और अंक गलती से मिले हैं। सही बात बताना ईमानदारी है, भले ही मेरे अंक कम हो जाएँ।
(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”
• यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
उत्तर: मधुर और शांत वाणी से झगड़े और गलतफहमियाँ कम होंगी। लोगों में सम्मान, सहयोग और अपनापन बढ़ेगा तथा घर, विद्यालय और समाज का वातावरण अधिक शांतिपूर्ण होगा।
• क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।
उत्तर: किसी को अपमानित करने वाले कटु वचन आवश्यक नहीं हैं। लेकिन गलत काम रोकने या सच स्पष्ट करने के लिए कभी-कभी दृढ़ भाषा जरूरी हो सकती है। दृढ़ बात भी सम्मानपूर्वक कही जा सकती है।
(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।”
• यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?
उत्तर: मैं समझाऊँगा कि सच्चा बड़ा व्यक्ति वही है जो अपनी योग्यता, धन या पद का उपयोग दूसरों की सहायता के लिए करे। केवल ऊँचा पद या संपत्ति महानता का प्रमाण नहीं है।
• खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।
उत्तर: खजूर फल देता है। नारियल से पानी, गिरी, तेल और रेशा मिलता है। इसलिए ये वृक्ष उपयोगी हैं। दोहे में खजूर का उदाहरण केवल यह समझाने के लिए है कि मनुष्य को दूसरों के काम आना चाहिए।
• आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?
उत्तर: मैं ईमानदारी, जिम्मेदारी, अनुशासन, सहयोग, निष्पक्षता, विनम्रता, सबकी बात सुनने और सही निर्णय लेने जैसी विशेषताओं पर ध्यान दूँगा।
(च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।”
• यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा?
उत्तर: गलतियाँ बताने वाला व्यक्ति उन कमियों को पहचानने में मदद कर सकता है जिन्हें हम स्वयं नहीं देख पाते। उचित आलोचना से हम अपने व्यवहार और काम में सुधार कर सकते हैं।
• यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
उत्तर: यदि कोई गलतियाँ न बताए तो लोग अपनी कमियाँ पहचान नहीं पाएँगे और वही गलतियाँ दोहराते रहेंगे। इसलिए सम्मानपूर्ण और सुधार के उद्देश्य से की गई आलोचना समाज के लिए उपयोगी है।
(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”
• कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?
उत्तर: मैं अच्छी और उपयोगी बातों को अपनाऊँगा और अफवाह, गलत सूचना तथा बुरी आदतों को छोड़ दूँगा। इससे मेरे निर्णय अधिक समझदारीपूर्ण होंगे।
• यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: बिना सोचे हर बात मानने से हम झूठी जानकारी, अफवाह या गलत सलाह से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सूचना को स्वीकार करने से पहले उसे जाँचना चाहिए।
(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।”
• यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?
उत्तर: मैं अपने मन को ऐसी जगह ले जाना चाहूँगा जहाँ शांति, प्रकृति और सीखने के अवसर हों, क्योंकि ऐसा वातावरण मन को प्रसन्न और सकारात्मक बनाता है।
• संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: अच्छी संगति से अच्छी आदतें, अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित हो सकती है। बुरी संगति गलत आदतों और निर्णयों की ओर ले जा सकती है।
7. अन्य
वाद-विवाद
“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”
(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
उत्तर: पक्ष: आज के समय में संतुलन बहुत जरूरी है। अधिक बोलना, अधिक स्क्रीन-टाइम या किसी भी चीज की अति हानि कर सकती है।
विपक्ष: हर परिस्थिति समान नहीं होती। कभी किसी सही बात के लिए अधिक बोलना या लक्ष्य के लिए अतिरिक्त प्रयास करना आवश्यक हो सकता है।
(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे—
• पक्ष — वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
• विपक्ष — अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।
(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।
उत्तर: अपनी लेखन-पुस्तिका में पक्ष और विपक्ष के तर्क अलग-अलग लिखिए और अंत में अपना निष्कर्ष दीजिए।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए—
उत्तर: पाठ से उदाहरण: बानी, गुरु, गोविंद, साँच, निंदक, साधू, सूप, मन, संगति। इनमें से उपयुक्त शब्द दिए गए रिक्त स्थानों में लिखे जा सकते हैं।
दोहे और कहावतें
“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”
इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है। यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत ‘जैसा संग वैसा रंग’ (व्यक्ति जिस संगति में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है।) की तरह प्रयुक्त होती है। कहावतें
ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।
अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर: उदाहरण: जैसा संग वैसा रंग — अच्छे मित्रों के साथ रहकर रवि की पढ़ाई में रुचि बढ़ गई; सच है, जैसा संग वैसा रंग।
जहाँ चाह, वहाँ राह — कठिन अभ्यास के बाद सीमा ने प्रतियोगिता जीत ली; जहाँ चाह, वहाँ राह।
एकता में बल है — विद्यार्थियों ने मिलकर स्वच्छता अभियान सफल किया; एकता में बल है।
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए—
• गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।
• भाव-नृत्य प्रस्तुति।
• कविता पाठ करना।
• संगीत के साथ प्रस्तुत करना।
• अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।)
पाठ से आगे – आपकी बात
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
उत्तर: मेरे जीवन में मेरे शिक्षक ने मुझे सही दिशा दिखाने में सहायता की है। उन्होंने कठिन विषय समझाए, गलतियों को सुधारने का तरीका बताया और अनुशासन व आत्मविश्वास की सीख दी। विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभव के अनुसार उत्तर लिखें।
(ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, एक बार मेरी गलती बताई गई तो पहले मुझे बुरा लगा, लेकिन बाद में मैंने समझा कि वह सलाह मेरे सुधार के लिए थी। मैंने उस कमी पर काम किया और अगली बार बेहतर किया। विद्यार्थी अपना अनुभव लिखें।
(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे— मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, मित्रों की संगति हमारे विचार और आदतों को प्रभावित करती है। मेहनती और अनुशासित मित्रों के साथ रहने से मुझे भी नियमित रहने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार उत्तर लिखें।
सृजन
(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”
इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत— किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।)
उत्तर: कहानी – सत्य की जीत: विद्यालय की कबड्डी प्रतियोगिता में आरव की टीम जीत के करीब थी। अंतिम क्षण में उसकी टीम के एक खिलाड़ी ने नियम तोड़ा, लेकिन निर्णायक देख नहीं पाए। साथियों ने आरव से चुप रहने को कहा। आरव ने साहस करके निर्णायक को सच बता दिया। निर्णय बदल गया और उसकी टीम हार गई। शिक्षक ने उसकी ईमानदारी की प्रशंसा की। आरव ने समझा कि जीत से बड़ा सत्य और अच्छा चरित्र है।
(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।”
इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर: निबंध के लिए रूपरेखा: शिक्षक का परिचय, उनके पढ़ाने का तरीका, विद्यार्थियों के लिए उनका योगदान, उनसे मिली प्रेरणा और अंत में उनके प्रति सम्मान। साक्षात्कार में उनके शिक्षक बनने के कारण, विद्यार्थियों के लिए संदेश और कठिनाइयों से निपटने की सलाह पूछी जा सकती है।
कबीर हमारे समय में
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
उत्तर: कबीर आज होते तो पर्यावरण, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, झूठी खबरें, दिखावा, भेदभाव, भ्रष्टाचार, शिक्षा, आपसी सद्भाव और समय के सदुपयोग जैसे विषयों पर कविता लिख सकते थे।
(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर: मोबाइल: “मोबाइल में मत खो रहो, समय बड़ा अनमोल।
ज्ञान मिले तो ठीक है, वरना जीवन डोल।।”
पर्यावरण: “पेड़ बचाओ आज ही, इनसे जीवन साँस।
धरती हँसे हरी रहे, यही हमारी आस।।”
साइबर सुरक्षा और दोहे
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए—
(क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर: इंटरनेट पर अनावश्यक निजी जानकारी साझा करने से गोपनीयता का नुकसान, फर्जी खाते, धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग और पहचान के दुरुपयोग का खतरा हो सकता है। इसलिए पासवर्ड, OTP, पता और निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
(ख) “साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?
उत्तर: इंटरनेट की हर सूचना सही नहीं होती। इसलिए वेबसाइट या लेखक का नाम, प्रकाशित तिथि, प्रमाण और दूसरी विश्वसनीय वेबसाइटों से जानकारी का मिलान करना चाहिए। संदिग्ध लिंक और बिना प्रमाण के दावों को स्वीकार नहीं करना चाहिए।
आज के समय में
नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए—
अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया — “संगति का असर जीवन पर पड़ता है।”
उत्तर: “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”
एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा — “हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।”
उत्तर: “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।”
कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा — “बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो।”
उत्तर: “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”
सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा — “इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।”
उत्तर: “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।”
रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
उत्तर: “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।”
आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा — “आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।”
उत्तर: “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।”
8. FAQ's
1. ‘कबीर के दोहे’ पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
पाठ का मुख्य संदेश है कि जीवन में सत्य, संतुलन, मधुर वाणी, अच्छी संगति, गुरु का सम्मान, विवेक और दूसरों के काम आने की भावना अपनानी चाहिए।
2. कबीर ने गुरु को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना है?
कबीर के अनुसार गुरु ज्ञान देकर शिष्य को सही दिशा और ईश्वर की पहचान कराते हैं। इसलिए वे गुरु के मार्गदर्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं।
3. ‘अति का भला न बोलना’ दोहे से क्या सीख मिलती है?
इस दोहे से सीख मिलती है कि किसी भी बात की अति उचित नहीं होती। बोलने, चुप रहने और जीवन की अन्य गतिविधियों में संतुलन रखना चाहिए।
4. ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय’ का अर्थ क्या है?
अर्थ यह है कि विवेकशील व्यक्ति अच्छी और उपयोगी बातों को ग्रहण करता है तथा व्यर्थ या हानिकारक बातों को छोड़ देता है।
5. ‘निंदक नियरे राखिए’ से कबीर क्या समझाते हैं?
कबीर समझाते हैं कि उचित आलोचना से हमें अपनी कमियाँ पता चलती हैं। इसलिए आलोचना से सीखकर स्वयं को सुधारना चाहिए।
Comments
Join the discussion