वर्ण विचार कक्षा 6 से 8 | हिंदी व्याकरण

कक्षा 6–8 हिंदी व्याकरण | वर्ण, वर्णमाला, स्वर, व्यंजन, संयुक्त व्यंजन, अनुस्वार, अनुनासिक, विसर्ग और उच्चारण स्थान

क्या आपने कभी सोचा है कि “कमल” जैसा छोटा-सा शब्द आखिर बना कैसे? यदि इसे ध्यान से देखें, तो हमें क + म + ल मिलते हैं। इसी तरह “भारत” को अलग करने पर भ् + आ + र् + अ + त् जैसी ध्वनियों का क्रम सामने आता है। यानी जिन बड़े-बड़े शब्दों और वाक्यों का हम प्रतिदिन प्रयोग करते हैं, उनकी शुरुआत बहुत छोटी-छोटी ध्वनियों से होती है।

ठीक वैसे ही जैसे बहुत बड़ी इमारत छोटी-छोटी ईंटों से बनती है, भाषा के शब्द भी छोटी-छोटी ध्वनि-इकाइयों से बनते हैं। इन ध्वनियों के लिखित रूप को हम वर्ण कहते हैं।

लेकिन क्या सभी वर्ण एक जैसे होते हैं? बोलते समय हवा बिना किसी विशेष रुकावट के बाहर निकलती है, जबकि बोलते समय वायु को रुकावट का सामना करना पड़ता है। फिर अं, अँ और अः जैसे चिह्न क्यों दिखाई देते हैं? क्ष, त्र, ज्ञ और श्र कैसे बनते हैं?

इन प्रश्नों के उत्तर हमें वर्ण विचार में मिलते हैं। इस लेख में हम वर्ण विचार के सभी मुख्य भागों का सरल परिचय, उनकी परिभाषा और उदाहरण समझेंगे। आगे स्वर, व्यंजन, अनुस्वार-अनुनासिक और उच्चारण स्थान जैसे विषयों को उनके अलग-अलग लेखों में विस्तार से पढ़ेंगे।

वर्ण विचार क्या है?

हिंदी व्याकरण में भाषा का अध्ययन अलग-अलग स्तरों पर किया जाता है। जब हम भाषा की ध्वनियों और उनके लिखित रूप अर्थात् वर्णों के स्वरूप, भेद, उच्चारण आदि का अध्ययन करते हैं, तो इसे वर्ण विचार कहा जाता है।

व्याकरण के जिस भाग में वर्णों के स्वरूप, भेद, उच्चारण और उनके प्रयोग का अध्ययन किया जाता है, उसे वर्ण विचार कहते हैं।

सरल शब्दों में: वर्णों से संबंधित नियमों और विशेषताओं का अध्ययन वर्ण विचार कहलाता है।

जैसे— एक स्वर है और एक व्यंजन है। दोनों वर्ण हैं, लेकिन इनके उच्चारण की प्रकृति अलग-अलग है। इस अंतर को समझना वर्ण विचार का हिस्सा है।

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वर्ण क्या है?

जब हम कोई शब्द बोलते हैं, तो वह कई छोटी-छोटी ध्वनियों से मिलकर बनता है। इन ध्वनियों को और अधिक छोटे सार्थक ध्वनि-खंडों में विभाजित नहीं किया जा सकता।

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई, जिसके और छोटे ध्वनि-खंड नहीं किए जा सकते, वर्ण कहलाती है।

उदाहरण

कमल शब्द को देखें। इसके उच्चारण में क, म, ल जैसी मूल ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। इन ध्वनियों के लिखित चिह्न वर्ण कहलाते हैं।

इसी प्रकार अनार में अ, न, आ, र जैसे वर्णों की सहायता से शब्द का निर्माण होता है।

याद रखें: हम ध्वनि को सुनते हैं और उसके लिखित रूप अर्थात् वर्ण को देखते तथा लिखते हैं।
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वर्णमाला क्या है?

केवल वर्णों का होना पर्याप्त नहीं है। भाषा में प्रयुक्त वर्णों को सीखने और समझने के लिए उन्हें एक निश्चित क्रम में रखा जाता है। वर्णों की इसी क्रमबद्ध व्यवस्था को वर्णमाला कहते हैं।

किसी भाषा के सभी वर्णों के व्यवस्थित और निश्चित क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं।

उदाहरण

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ... स्वर वर्णों का क्रम है।

क, ख, ग, घ, ङ... व्यंजन वर्णों के क्रम का एक भाग है।

वर्ण और वर्णमाला में अंतर:
एक अकेला चिह्न जैसे = वर्ण
वर्णों का क्रमबद्ध समूह = वर्णमाला
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स्वर क्या हैं?

कुछ ध्वनियों का उच्चारण करते समय वायु बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता और बिना किसी विशेष रुकावट के मुख से बाहर निकलती है। ऐसी ध्वनियों को स्वर कहते हैं।

जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से और बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जाता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

उदाहरण

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ आदि स्वर हैं।

जैसे—अनार का आरंभ से तथा आम का आरंभ से होता है।

उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों के भेद को सामान्यतः ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत रूपों में समझाया जाता है।

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ह्रस्व स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में अपेक्षाकृत कम समय लगता है, उन्हें ह्रस्व स्वर कहा जाता है। इन्हें एक मात्रा वाले स्वर भी कहा जाता है।

अ, इ, उ ह्रस्व स्वर माने जाते हैं।

उदाहरण

इधर में तथा उधर में ह्रस्व स्वर के उदाहरण हैं।

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दीर्घ स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर की तुलना में अधिक समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। इन्हें सामान्यतः दो मात्रा वाले स्वर कहा जाता है।

आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर हैं।

उदाहरण

आम में तथा ईख में दीर्घ स्वर के उदाहरण हैं।

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प्लुत स्वर

जब किसी स्वर का उच्चारण सामान्य से अधिक समय तक खींचकर किया जाता है, तो उसे प्लुत स्वर कहा जाता है। परंपरागत व्याकरण में इसके उच्चारण का समय तीन मात्राओं के बराबर माना जाता है।

उदाहरण

किसी दूर खड़े व्यक्ति को पुकारते समय—“ओऽऽ राम!” या “आऽऽओ!” जैसे उच्चारण में स्वर को सामान्य से अधिक खींचा जाता है।

प्लुत कोई अलग मूल स्वर नहीं है; यह किसी स्वर के लंबे उच्चारण को बताता है।
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व्यंजन क्या हैं?

स्वरों के विपरीत व्यंजनों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से नहीं होता। इनके उच्चारण में स्वर की सहायता आवश्यक होती है और वायु को मुख के किसी भाग में पूर्ण या आंशिक रुकावट का सामना करना पड़ता है।

जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है तथा जिनके उच्चारण में वायु को किसी न किसी प्रकार की रुकावट का सामना करना पड़ता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

उदाहरण

क, ख, ग, च, ज, त, प, म, य, र, ल, व, श, स, ह आदि व्यंजन हैं।

जैसे का शुद्ध व्यंजन रूप क् है। उसमें स्वर जुड़ने पर उसका उच्चारण होता है।

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स्पर्श व्यंजन

जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय जीभ या मुख का कोई भाग उच्चारण-स्थान को स्पर्श करता है और वायु का मार्ग कुछ क्षण के लिए रुकता है, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं।

ये व्यंजन पाँच वर्गों में व्यवस्थित किए जाते हैं— क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग और प-वर्ग।

उदाहरण

क, ख, ग, घ, ङ — क-वर्ग
प, फ, ब, भ, म — प-वर्ग

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अंतःस्थ व्यंजन

जिन व्यंजनों के उच्चारण में वायु का मार्ग स्पर्श व्यंजनों की तरह पूरी तरह बंद नहीं होता और जिनकी प्रकृति स्वर तथा व्यंजन के बीच की मानी जाती है, उन्हें अंतःस्थ व्यंजन कहते हैं।

य, र, ल, व अंतःस्थ व्यंजन हैं।

उदाहरण

— योग
— रथ

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ऊष्म व्यंजन

जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय वायु मुख से घर्षण के साथ बाहर निकलती है और एक प्रकार की ऊष्मा या गरमाहट का अनुभव होता है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं।

श, ष, स, ह ऊष्म व्यंजन हैं।

उदाहरण

— शेर
— समय

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संयुक्त व्यंजन

जब दो या दो से अधिक व्यंजन बिना बीच में स्वर आए मिलकर एक संयुक्त रूप बनाते हैं, तो उसे संयुक्त व्यंजन कहा जाता है।

विद्यालयी हिंदी व्याकरण में क्ष, त्र, ज्ञ और श्र को प्रायः संयुक्त व्यंजन के रूप में पढ़ाया जाता है।

उदाहरण

क्ष = क् + ष — क्षमा
त्र = त् + र — त्रिशूल

इसी प्रकार ज्ञ और श्र भी संयुक्त रूप हैं।

ध्यान दें: संयुक्त व्यंजन स्वतंत्र मूल वर्ण नहीं, बल्कि व्यंजनों के मेल से बने संयुक्त रूप हैं।
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अनुस्वार क्या है?

अनुस्वार हिंदी में प्रयुक्त एक विशेष चिह्न है, जिसे अक्षर के ऊपर बिंदु (ं) के रूप में लगाया जाता है। यह प्रसंग के अनुसार नासिक्य ध्वनि को प्रकट करता है।

अनुस्वार का चिह्न — ं

उदाहरण

अंग
संत

इन शब्दों में ऊपर लगा बिंदु अनुस्वार का चिह्न है।

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अनुनासिक क्या है?

जब किसी स्वर का उच्चारण मुख और नाक दोनों से होता है, तो वह अनुनासिक स्वर कहलाता है। इसे प्रायः चंद्रबिंदु (ँ) से दर्शाया जाता है।

अनुनासिकता का प्रमुख चिह्न — ँ

उदाहरण

माँ
चाँद

इन शब्दों में स्वर का उच्चारण नासिका की सहायता से भी होता है।

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अनुस्वार और अनुनासिक में अंतर

अनुस्वार और अनुनासिक दोनों का संबंध नासिक्य उच्चारण से है, इसलिए विद्यार्थी अक्सर इनमें भ्रम कर देते हैं। दोनों के चिह्न और प्रयोग अलग हैं।

आधार अनुस्वार अनुनासिक
चिह्न
रूप बिंदु चंद्रबिंदु
उदाहरण अंग, संत माँ, चाँद
आसान पहचान:
ं = अनुस्वार
ँ = अनुनासिकता/चंद्रबिंदु
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विसर्ग क्या है?

विसर्ग एक विशेष चिह्न है, जो दो बिंदुओं के रूप में लिखा जाता है—। इसका प्रयोग हिंदी में मुख्यतः संस्कृत से आए शब्दों में दिखाई देता है।

विसर्ग का चिह्न — ः

उदाहरण

दुःख
प्रातः

इन शब्दों में विसर्ग का चिह्न है।

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उच्चारण स्थान क्या है?

हम सभी वर्णों का उच्चारण मुख के एक ही भाग से नहीं करते। किसी वर्ण के उच्चारण में कंठ प्रमुख होता है, किसी में तालु, किसी में जीभ का अग्रभाग और किसी में होंठ।

मुख के जिस भाग की सहायता से किसी वर्ण का उच्चारण प्रमुख रूप से किया जाता है, उसे उस वर्ण का उच्चारण स्थान कहते हैं।

प्रमुख उच्चारण स्थान

उच्चारण स्थान सरल अर्थ उदाहरण
कंठ्य कंठ से उच्चरित क, ख
तालव्य तालु की सहायता से च, छ
मूर्धन्य जीभ को मूर्धा की ओर ले जाकर ट, ठ
दंत्य दाँतों की सहायता से त, थ
ओष्ठ्य होंठों की सहायता से प, फ

उच्चारण स्थान का विस्तृत अध्ययन अलग लेख में करेंगे, जहाँ प्रत्येक वर्ग के वर्ण और उनके उच्चारण को विस्तार से समझाया जाएगा।

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वर्ण विचार – झटपट पुनरावृत्ति

विषय एक लाइन में अर्थ उदाहरण
वर्ण भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई का लिखित रूप अ, क, म
वर्णमाला वर्णों का निश्चित क्रमबद्ध समूह अ, आ, इ... / क, ख, ग...
स्वर स्वतंत्र रूप से उच्चरित वर्ण अ, आ
ह्रस्व कम समय में उच्चरित स्वर अ, इ
दीर्घ अधिक समय में उच्चरित स्वर आ, ई
प्लुत सामान्य से अधिक खींचा गया स्वर ओऽऽ!
व्यंजन स्वर की सहायता से उच्चरित वर्ण क, ग
स्पर्श उच्चारण में मुख के अंगों का स्पर्श क, त
अंतःस्थ स्वर और व्यंजन के बीच की प्रकृति वाले व्यंजन य, र
ऊष्म घर्षण के साथ उच्चरित व्यंजन श, स
संयुक्त व्यंजन दो या अधिक व्यंजनों का संयुक्त रूप क्ष, त्र
अनुस्वार नासिक्य ध्वनि दर्शाने वाला बिंदु अंग
अनुनासिक मुख और नाक दोनों से उच्चरित स्वर माँ
विसर्ग ः चिह्न दुःख
उच्चारण स्थान वर्ण के उच्चारण में प्रयुक्त मुख का प्रमुख स्थान कंठ्य, दंत्य
सबसे आसान क्रम:
वर्ण → वर्णमाला → स्वर/व्यंजन → उनके भेद → विशेष चिह्न → उच्चारण स्थान
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अभ्यास प्रश्न

वर्ण विचार किसे कहते हैं?

उत्तर: व्याकरण के जिस भाग में वर्णों के स्वरूप, भेद, उच्चारण और प्रयोग का अध्ययन किया जाता है, उसे वर्ण विचार कहते हैं।

वर्ण किसे कहते हैं?

उत्तर: भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई, जिसके और छोटे ध्वनि-खंड नहीं किए जा सकते, वर्ण कहलाती है।

वर्णमाला किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी भाषा के सभी वर्णों के निश्चित और व्यवस्थित क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं।

स्वर किसे कहते हैं?

उत्तर: जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से और बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जाता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर: जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है तथा जिनके उच्चारण में वायु को रुकावट का सामना करना पड़ता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

संयुक्त व्यंजन क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बने संयुक्त रूप संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं। जैसे—क्ष और त्र।

अनुस्वार और अनुनासिक के चिह्न लिखिए।

उत्तर: अनुस्वार का चिह्न तथा अनुनासिकता का प्रमुख चिह्न है।

विसर्ग का चिह्न क्या है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: विसर्ग का चिह्न है। उदाहरण—दुःख

उच्चारण स्थान किसे कहते हैं?

उत्तर: मुख के जिस भाग की सहायता से किसी वर्ण का उच्चारण प्रमुख रूप से किया जाता है, उसे उस वर्ण का उच्चारण स्थान कहते हैं।

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महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई क्या कहलाती है?

  1. शब्द
  2. वर्ण
  3. वाक्य
  4. लिपि

सही उत्तर: B — वर्ण

वर्णों के निश्चित क्रमबद्ध समूह को क्या कहते हैं?

  1. वर्णमाला
  2. व्यंजन
  3. लिपि
  4. स्वर

सही उत्तर: A — वर्णमाला

निम्नलिखित में से कौन-सा स्वर है?

सही उत्तर: C — आ

निम्नलिखित में से कौन-सा ह्रस्व स्वर है?

सही उत्तर: D — इ

य, र, ल, व किस प्रकार के व्यंजन हैं?

  1. स्पर्श
  2. अंतःस्थ
  3. ऊष्म
  4. संयुक्त

सही उत्तर: B — अंतःस्थ

श, ष, स, ह किस श्रेणी में आते हैं?

  1. ऊष्म व्यंजन
  2. स्वर
  3. अंतःस्थ व्यंजन
  4. संयुक्त व्यंजन

सही उत्तर: A — ऊष्म व्यंजन

अनुस्वार का चिह्न कौन-सा है?

सही उत्तर: C — ं

निम्नलिखित में से किस शब्द में अनुनासिकता है?

  1. संत
  2. अंग
  3. दुःख
  4. माँ

सही उत्तर: D — माँ

विसर्ग का चिह्न कौन-सा है?

सही उत्तर: A — ः

क्ष किस प्रकार का रूप है?

  1. ह्रस्व स्वर
  2. ऊष्म व्यंजन
  3. संयुक्त व्यंजन
  4. अंतःस्थ व्यंजन

सही उत्तर: C — संयुक्त व्यंजन

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – वर्ण विचार

वर्ण विचार क्या है?

व्याकरण के जिस भाग में वर्णों के स्वरूप, भेद, उच्चारण और प्रयोग का अध्ययन किया जाता है, उसे वर्ण विचार कहते हैं।

वर्ण किसे कहते हैं?

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई, जिसके और छोटे ध्वनि-खंड नहीं किए जा सकते, वर्ण कहलाती है।

वर्ण और वर्णमाला में क्या अंतर है?

वर्ण भाषा की सबसे छोटी मूल ध्वनि है, जिसे एक निश्चित लिखित चिह्न से प्रकट किया जाता है, जबकि भाषा के सभी वर्णों के निश्चित और व्यवस्थित क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं।

स्वर किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से और बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जाता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

ह्रस्व और दीर्घ स्वर में क्या अंतर है?

ह्रस्व स्वरों के उच्चारण में कम समय लगता है, जबकि दीर्घ स्वरों के उच्चारण में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।

व्यंजन किसे कहते हैं?

जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है तथा जिनके उच्चारण में वायु को किसी प्रकार की रुकावट का सामना करना पड़ता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

अंतःस्थ व्यंजन कौन-कौन से हैं?

य, र, ल और व अंतःस्थ व्यंजन हैं।

ऊष्म व्यंजन कौन-कौन से हैं?

श, ष, स और ह ऊष्म व्यंजन हैं।

अनुस्वार और अनुनासिक में क्या अंतर है?

अनुस्वार को सामान्यतः बिंदु (ं) से दर्शाया जाता है, जबकि स्वर की अनुनासिकता को प्रायः चंद्रबिंदु (ँ) से दर्शाया जाता है।

उच्चारण स्थान क्या होता है?

मुख के जिस भाग की सहायता से किसी वर्ण का उच्चारण प्रमुख रूप से किया जाता है, उसे उस वर्ण का उच्चारण स्थान कहते हैं।

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