शब्द विचार (Shabd Vichar) – शब्दों का वर्गीकरण, भेद एवं उदाहरण
मुख्य विषय: शब्द की परिभाषा, शब्दों का वर्गीकरण, तत्सम-तद्भव, देशज-विदेशज, रूढ़-यौगिक-योगरूढ़, अर्थ के आधार पर शब्द तथा विकारी-अविकारी शब्द।
शब्द किसे कहते हैं?
भाषा में हम अपने विचार व्यक्त करने के लिए वाक्यों का प्रयोग करते हैं और वाक्य शब्दों से मिलकर बनते हैं। शब्द स्वयं वर्णों से बनते हैं।
यहाँ ‘क’, ‘म’ और ‘ल’ वर्ण हैं। इन वर्णों को उचित क्रम में मिलाने पर कमल शब्द बनता है। ‘कमल’ सुनते ही हमें एक विशेष फूल का बोध होता है। इसलिए यह एक सार्थक शब्द है।
परिभाषा: एक या एक से अधिक वर्णों के ऐसे सार्थक मेल को शब्द कहते हैं, जिससे किसी निश्चित अर्थ का बोध होता है।
वर्ण और शब्द में अंतर
| वर्ण | शब्द |
|---|---|
| भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई। | वर्णों के सार्थक मेल से बना रूप। |
| जैसे— क, म, ल | जैसे— कमल |
सार्थक और निरर्थक शब्द
सार्थक शब्द: जिन शब्दों से किसी निश्चित अर्थ का बोध होता है, वे सार्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे— घर, पानी, गाय, पुस्तक, विद्यालय।
निरर्थक शब्द/वर्ण-समूह: ऐसे वर्ण-समूह जिनसे स्वतंत्र रूप से कोई निश्चित अर्थ प्रकट नहीं होता, उन्हें सामान्यतः निरर्थक कहा जाता है। बोलचाल में जैसे— चाय-वाय, खाना-वाना। यहाँ ‘वाय’ और ‘वाना’ स्वतंत्र निश्चित अर्थ नहीं देते।
शब्द विचार किसे कहते हैं?
हिंदी व्याकरण के जिस भाग में शब्दों के स्वरूप, उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग का अध्ययन किया जाता है, उसे शब्द विचार कहते हैं।
शब्दों का वर्गीकरण
हिंदी के सभी शब्द एक जैसे नहीं होते। किसी शब्द का स्रोत संस्कृत होता है, कोई स्थानीय बोली से आता है, कोई विदेशी भाषा से लिया गया होता है और कोई दो सार्थक शब्दों को जोड़कर बनाया जाता है। इसी कारण शब्दों को विभिन्न आधारों पर बाँटा जाता है।
2. रचना के आधार पर → रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
3. अर्थ एवं अर्थ-संबंध के आधार पर → एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची, विलोम, समोच्चरित भिन्नार्थक
4. प्रयोग के आधार पर → विकारी और अविकारी
1. उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
हिंदी भाषा का शब्द-भंडार बहुत विशाल है। इसमें संस्कृत, प्राकृत-अपभ्रंश, स्थानीय बोलियों तथा विदेशी भाषाओं से आए शब्द शामिल हैं। उत्पत्ति या स्रोत के आधार पर शब्दों के चार मुख्य भेद माने जाते हैं— तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज।
तत्सम शब्द
संस्कृत भाषा के वे शब्द जो हिंदी में अपने मूल रूप या लगभग उसी रूप में प्रयोग किए जाते हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं।
तत्सम = तत् + सम = उसके समान
उदाहरण— अग्नि, सूर्य, चंद्र, रात्रि, ग्राम, दंत, हस्त, मुख, दुग्ध, कर्ण, पुत्र, माता, कर्म, धर्म, मित्र।
तद्भव शब्द
संस्कृत के वे शब्द जिनके रूप में समय के साथ परिवर्तन हो गया और जो बदले हुए रूप में हिंदी में प्रचलित हो गए, तद्भव शब्द कहलाते हैं।
तद्भव = तत् + भव = उससे उत्पन्न
उदाहरण— अग्नि → आग, दुग्ध → दूध, दंत → दाँत, हस्त → हाथ, ग्राम → गाँव, रात्रि → रात, कर्ण → कान, मुख → मुँह।
तत्सम और तद्भव शब्द – उदाहरण एवं अंतर
| तत्सम | तद्भव |
|---|---|
| अग्नि | आग |
| अक्षि | आँख |
| अंगुष्ठ | अँगूठा |
| अर्ध | आधा |
| कर्ण | कान |
| ग्राम | गाँव |
| दंत | दाँत |
| दुग्ध | दूध |
| हस्त | हाथ |
| मुख | मुँह |
| रात्रि | रात |
| जिह्वा | जीभ |
| नासिका | नाक |
| पत्र | पत्ता |
| सर्प | साँप |
| सूर्य | सूरज |
| चंद्र | चाँद |
| कर्पूर | कपूर |
| काष्ठ | काठ |
| सप्त | सात |
| अष्ट | आठ |
| शत | सौ |
| निद्रा | नींद |
| अश्रु | आँसू |
तत्सम और तद्भव में अंतर
| तत्सम | तद्भव |
|---|---|
| संस्कृत के मूल रूप के निकट होते हैं। | संस्कृत से विकसित बदले हुए रूप होते हैं। |
| उदाहरण— अग्नि, दंत, हस्त। | उदाहरण— आग, दाँत, हाथ। |
देशज और विदेशज शब्द
देशज शब्द
वे शब्द जो स्थानीय भारतीय बोलियों, जनभाषाओं और लोक-प्रयोग से हिंदी में प्रचलित हुए हैं, देशज शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण— खटिया, झोपड़ी, डिबिया, पगड़ी, लोटा, झटपट आदि।
विदेशज शब्द
दूसरी विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए शब्दों को विदेशज या विदेशी शब्द कहते हैं। लंबे समय से प्रयोग होने के कारण बहुत से विदेशज शब्द अब सामान्य हिंदी का हिस्सा बन चुके हैं।
| भाषा/स्रोत | उदाहरण |
|---|---|
| अंग्रेजी | स्कूल, कॉलेज, रेल, स्टेशन, टिकट, डॉक्टर, पुलिस, बस, पेन, कंप्यूटर, मोबाइल |
| अरबी-फारसी | किताब, अखबार, आदमी, बाजार, दरवाजा, कागज, दुकान, दीवार, जमीन |
| पुर्तगाली आदि | अलमारी, चाबी, बाल्टी आदि |
2. रचना के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
रचना के आधार पर यह देखा जाता है कि शब्द की बनावट कैसी है और वह किन सार्थक भागों से बना है। रचना के आधार पर शब्द तीन प्रकार के होते हैं— रूढ़, यौगिक और योगरूढ़।
रूढ़ शब्द
जिन शब्दों के ऐसे सार्थक खंड नहीं किए जा सकते जिनसे उस शब्द का वास्तविक अर्थ प्राप्त हो, उन्हें रूढ़ शब्द कहते हैं।
उदाहरण— घर, जल, घोड़ा, पेड़, नाक, दिन, कलम।
यौगिक शब्द
दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बने शब्दों को यौगिक शब्द कहते हैं।
राज + पुत्र = राजपुत्र
रसोई + घर = रसोईघर
देश + भक्ति = देशभक्ति
पाठ + शाला = पाठशाला
रेल + गाड़ी = रेलगाड़ी
योगरूढ़ शब्द
जो शब्द दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बने हों, लेकिन मिलकर किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो गए हों, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं।
दशानन = दश + आनन → शाब्दिक अर्थ: दस मुख वाला → विशेष अर्थ: रावण
नीलकंठ = नील + कंठ → विशेष संदर्भ में: भगवान शिव
लंबोदर → विशेष अर्थ: भगवान गणेश
रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ में अंतर
| प्रकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूढ़ | सार्थक खंड नहीं किए जा सकते | घर |
| यौगिक | दो या अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बना | विद्यालय |
| योगरूढ़ | सार्थक शब्दों से बना, पर विशेष अर्थ देता है | पंकज |
3. अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
शब्द का अर्थ क्या है और उसका दूसरे शब्दों से अर्थ का क्या संबंध है, इस आधार पर भी शब्दों का अध्ययन किया जाता है। कक्षा 6–8 के स्तर पर एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची, विलोम और समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
एकार्थी शब्द
जिन शब्दों का सामान्यतः एक निश्चित अर्थ होता है, उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं। जैसे— विद्यालय, हिमालय, पुस्तकालय आदि।
अनेकार्थी शब्द
जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं। इनका सही अर्थ वाक्य और प्रसंग से समझा जाता है।
पत्र – चिट्ठी / पत्ता
अंक – संख्या / गोद / परीक्षा में प्राप्त संख्या
फल – खाने वाला फल / परिणाम
उत्तर – जवाब / दिशा
पर्यायवाची शब्द
समान या लगभग समान अर्थ व्यक्त करने वाले शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| सूर्य | रवि, भानु, दिनकर, आदित्य |
| चंद्रमा | चाँद, शशि, इंदु |
| पृथ्वी | धरती, धरा, वसुंधरा |
| जल | पानी, नीर |
| आकाश | नभ, गगन, अंबर |
| वायु | हवा, पवन, समीर |
| कमल | पंकज, नीरज, सरोज |
विलोम शब्द
एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों को विलोम शब्द कहते हैं।
समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द
जिन शब्दों का उच्चारण बहुत समान या लगभग एक जैसा हो, लेकिन उनके अर्थ अलग-अलग हों, वे समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।
और = तथा, ओर = दिशा
कुल = वंश, कूल = किनारा
चिर = बहुत समय, चीर = वस्त्र
4. प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण
वाक्य में प्रयोग और शब्द के रूप में होने वाले परिवर्तन के आधार पर शब्दों को दो मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है— विकारी और अविकारी।
विकारी शब्द
जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, काल या कारक आदि के कारण परिवर्तन हो सकता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं।
अच्छा → अच्छी
जाता → जाती
विकारी शब्दों के चार मुख्य भेद हैं— संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।
संज्ञा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, गुण, अवस्था या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे— राम, सीता, दिल्ली, भारत, गाय, पुस्तक, बचपन, मिठास।
सर्वनाम
संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जैसे— मैं, हम, तुम, आप, यह, वह, ये, वे।
विशेषण
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। जैसे— सुंदर फूल, मीठा आम, लंबा पेड़, चार पुस्तकें।
क्रिया
जिस शब्द से किसी कार्य के करने, होने या अवस्था का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे— पढ़ना, लिखना, चलना, सोना, खेलना।
अविकारी शब्द
जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, काल या कारक आदि के कारण परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द या अव्यय कहते हैं।
इनके प्रमुख भेद हैं— क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
क्रिया-विशेषण
जो शब्द मुख्य रूप से क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें क्रिया-विशेषण कहते हैं। जैसे— धीरे, जल्दी, आज, यहाँ, बहुत।
संबंधबोधक
जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बताते हैं, उन्हें संबंधबोधक कहते हैं। जैसे— के पास, के ऊपर, के नीचे, के सामने, के साथ।
समुच्चयबोधक
जो शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे— और, लेकिन, अथवा, क्योंकि, इसलिए।
विस्मयादिबोधक
जो शब्द हर्ष, शोक, आश्चर्य, प्रशंसा आदि भावों को अचानक व्यक्त करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं। जैसे— वाह!, अरे!, ओह!, हाय!, शाबाश!
विकारी और अविकारी में अंतर
| विकारी | अविकारी |
|---|---|
| रूप में परिवर्तन हो सकता है। | रूप में सामान्यतः परिवर्तन नहीं होता। |
| संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया | क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
शब्दों का पूरा वर्गीकरण – एक नजर में
| वर्गीकरण का आधार | मुख्य भेद |
|---|---|
| उत्पत्ति के आधार पर | तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज |
| रचना के आधार पर | रूढ़, यौगिक, योगरूढ़ |
| अर्थ के आधार पर | एकार्थी, अनेकार्थी |
| अर्थ-संबंध के आधार पर | पर्यायवाची, विलोम, समोच्चरित भिन्नार्थक |
| प्रयोग के आधार पर | विकारी, अविकारी |
| विकारी | संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया |
| अविकारी | क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक |
उत्पत्ति → तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज
रचना → रूढ़, यौगिक, योगरूढ़
प्रयोग → विकारी, अविकारी
शब्द विचार – महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: एक या एक से अधिक वर्णों के ऐसे सार्थक मेल को शब्द कहते हैं जिससे किसी निश्चित अर्थ का बोध हो।
प्रश्न 2. शब्द विचार किसे कहते हैं?
उत्तर: हिंदी व्याकरण के जिस भाग में शब्दों के स्वरूप, उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग का अध्ययन किया जाता है, उसे शब्द विचार कहते हैं।
प्रश्न 3. शब्दों का वर्गीकरण किन आधारों पर किया जाता है?
उत्तर: शब्दों का वर्गीकरण मुख्य रूप से उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग के आधार पर किया जाता है।
प्रश्न 4. उत्पत्ति के आधार पर शब्द कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज—चार मुख्य प्रकार।
प्रश्न 5. तत्सम शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: संस्कृत से मूल या लगभग मूल रूप में हिंदी में प्रयुक्त शब्द तत्सम कहलाते हैं। जैसे— अग्नि, सूर्य, रात्रि।
प्रश्न 6. तद्भव शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: संस्कृत के शब्दों से विकसित होकर बदले हुए रूप में हिंदी में प्रचलित शब्द तद्भव कहलाते हैं। जैसे— आग, दूध, दाँत।
प्रश्न 7. तत्सम और तद्भव में क्या अंतर है?
उत्तर: तत्सम संस्कृत के मूल रूप के निकट रहता है, जबकि तद्भव उसी पुराने शब्द का विकसित बदला हुआ रूप होता है। जैसे— अग्नि/आग।
प्रश्न 8. रचना के आधार पर शब्द कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: रूढ़, यौगिक और योगरूढ़—तीन प्रकार।
प्रश्न 9. यौगिक शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से बने शब्द यौगिक कहलाते हैं। जैसे— विद्यालय = विद्या + आलय।
प्रश्न 10. योगरूढ़ शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसा शब्द जो सार्थक शब्दों के मेल से बना हो लेकिन किसी विशेष अर्थ के लिए प्रसिद्ध हो गया हो, योगरूढ़ कहलाता है। जैसे— पंकज = कमल।
प्रश्न 11. विकारी शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, काल या कारक आदि के कारण परिवर्तन हो सकता है, वे विकारी शब्द कहलाते हैं।
प्रश्न 12. अविकारी शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि के कारण परिवर्तन नहीं होता, वे अविकारी या अव्यय कहलाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
रिक्त स्थान भरिए
- संस्कृत के समान रूप वाले शब्द ______ कहलाते हैं।
- ‘आग’ ______ शब्द का उदाहरण है।
- ‘स्कूल’ ______ शब्द है।
- ‘विद्यालय’ ______ शब्द है।
- ‘पंकज’ ______ शब्द है।
- संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्दों को ______ कहते हैं।
- ‘और’ ______ अव्यय है।
- जिन शब्दों के रूप में परिवर्तन नहीं होता उन्हें ______ कहते हैं।
उत्तर: 1. तत्सम, 2. तद्भव, 3. विदेशज, 4. यौगिक, 5. योगरूढ़, 6. सर्वनाम, 7. समुच्चयबोधक, 8. अविकारी।
सही या गलत बताइए
- अग्नि तद्भव शब्द है।
- आग तद्भव शब्द है।
- विद्यालय यौगिक शब्द है।
- पंकज योगरूढ़ शब्द है।
- संज्ञा विकारी शब्द है।
- ‘वाह!’ विस्मयादिबोधक है।
उत्तर: 1. गलत, 2. सही, 3. सही, 4. सही, 5. सही, 6. सही।
20 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
‘शब्द विचार’ में किसका अध्ययन किया जाता है?
सही उत्तर: B — शब्दों के स्वरूप, उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग का
संस्कृत से लगभग मूल रूप में आए शब्द कहलाते हैं—
सही उत्तर: B — तत्सम
‘आग’ किस प्रकार का शब्द है?
सही उत्तर: B — तद्भव
‘अग्नि’ का तद्भव रूप है—
सही उत्तर: B — आग
‘स्कूल’ किस प्रकार का शब्द है?
सही उत्तर: C — विदेशज
रचना के आधार पर शब्दों के कितने मुख्य भेद हैं?
सही उत्तर: B — तीन
‘विद्यालय’ किस प्रकार का शब्द है?
सही उत्तर: B — यौगिक
‘पंकज’ किस प्रकार का शब्द है?
सही उत्तर: C — योगरूढ़
‘पंकज’ का विशेष अर्थ है—
सही उत्तर: C — कमल
‘घर’ रचना के आधार पर कौन-सा शब्द है?
सही उत्तर: A — रूढ़
‘दिन–रात’ कौन-से शब्द हैं?
सही उत्तर: B — विलोम
‘जल–नीर’ कौन-से शब्द हैं?
सही उत्तर: A — पर्यायवाची
‘कल’ किसका उदाहरण है?
सही उत्तर: A — अनेकार्थी
संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द कहलाते हैं—
सही उत्तर: C — सर्वनाम
निम्न में से कौन विकारी शब्द है?
सही उत्तर: A — संज्ञा
निम्न में से कौन अविकारी शब्द है?
सही उत्तर: C — और
‘राम और श्याम पढ़ते हैं।’ में ‘और’ है—
सही उत्तर: B — समुच्चयबोधक
‘वाह!’ किस प्रकार का अव्यय है?
सही उत्तर: D — विस्मयादिबोधक
‘वह धीरे चलता है।’ में ‘धीरे’ है—
सही उत्तर: C — क्रिया-विशेषण
विकारी शब्दों के मुख्य भेद कितने हैं?
सही उत्तर: C — चार
शब्द विचार – Frequently Asked Questions (FAQ)
शब्द विचार क्या है?
उत्तर: शब्दों के स्वरूप, उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग के अध्ययन को शब्द विचार कहते हैं।
शब्दों का वर्गीकरण कितने आधारों पर किया जाता है?
उत्तर: विद्यालयी स्तर पर शब्दों को मुख्य रूप से उत्पत्ति, रचना, अर्थ और प्रयोग के आधार पर समझाया जाता है।
उत्पत्ति के आधार पर शब्दों के कितने भेद हैं?
उत्तर: चार— तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज।
रचना के आधार पर शब्दों के कितने भेद हैं?
उत्तर: तीन— रूढ़, यौगिक और योगरूढ़।
तत्सम और तद्भव का आसान उदाहरण क्या है?
उत्तर: ‘अग्नि’ तत्सम शब्द है और ‘आग’ उसका तद्भव रूप है।
यौगिक शब्द का उदाहरण क्या है?
उत्तर: विद्यालय यौगिक शब्द है क्योंकि यह विद्या + आलय से बना है।
योगरूढ़ शब्द का उदाहरण क्या है?
उत्तर: पंकज योगरूढ़ शब्द है। इसका विशेष अर्थ ‘कमल’ है।
विकारी शब्दों के मुख्य भेद कौन-कौन से हैं?
उत्तर: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।
अविकारी शब्दों के मुख्य भेद कौन-कौन से हैं?
उत्तर: क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
निष्कर्ष
शब्द विचार हिंदी व्याकरण का एक आधारभूत और महत्वपूर्ण विषय है। इसमें विद्यार्थी यह सीखते हैं कि शब्द कहाँ से आया, कैसे बना, उसका अर्थ क्या है और वाक्य में उसका प्रयोग किस प्रकार होता है। उत्पत्ति के आधार पर तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज; रचना के आधार पर रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ तथा प्रयोग के आधार पर विकारी और अविकारी शब्दों का अध्ययन किया जाता है।
यदि विद्यार्थी परिभाषाओं को केवल रटने के बजाय उदाहरणों और पहचानने की विधि के साथ समझें, तो शब्द विचार का पूरा अध्याय बहुत आसान हो जाता है।
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