भाषा और व्याकरण – Class 6–8 Hindi Grammar

कक्षा 6–8 हिंदी व्याकरण | भाषा, भाषा के रूप, लिपि, देवनागरी लिपि और व्याकरण

क्या आपने कभी सोचा है कि यदि हमारे पास भाषा न होती, तो हम अपने मन की बात किसी दूसरे व्यक्ति तक कैसे पहुँचाते? भूख लगने पर माँ से क्या कहते? मित्र को कोई मजेदार घटना कैसे बताते? शिक्षक हमें कोई नया विषय कैसे समझाते?

हम बोलकर कहते हैं—“मुझे पानी चाहिए।” हम लिखकर संदेश भेजते हैं— “मैं आज विद्यालय नहीं आ पाऊँगा।” कभी अपनी खुशी बताते हैं, कभी प्रश्न पूछते हैं और कभी किसी पुस्तक को पढ़कर ऐसे व्यक्ति के विचार भी समझ लेते हैं, जो हमारे सामने मौजूद ही नहीं है।

यह सब संभव होता है भाषा के कारण। लेकिन एक प्रश्न और है— यदि हर व्यक्ति शब्दों को अपनी इच्छा से किसी भी क्रम में बोले या लिखे, तो क्या भाषा आसानी से समझ में आएगी?

उदाहरण के लिए “मैं विद्यालय जाता हूँ।” सुनते ही अर्थ स्पष्ट हो जाता है, लेकिन “विद्यालय हूँ जाता मैं।” सुनने पर वही शब्द होते हुए भी वाक्य अस्वाभाविक लगता है। भाषा को शुद्ध और व्यवस्थित बनाने वाले नियमों का ज्ञान हमें व्याकरण कराता है।

इस लेख में हम उदाहरणों के साथ विस्तार से जानेंगे कि भाषा क्या है, भाषा के रूप कौन-कौन से हैं, मौखिक और लिखित भाषा में क्या अंतर है, लिपि क्या है, हिंदी की देवनागरी लिपि क्या है और व्याकरण की आवश्यकता क्यों पड़ती है।

भाषा क्या है?

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज के दूसरे लोगों के साथ अपने विचार, भावनाएँ, आवश्यकताएँ और अनुभव साझा करता है। अपने मन की बात दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए उसे किसी माध्यम की आवश्यकता होती है। यही माध्यम भाषा कहलाता है।

जिस माध्यम से हम अपने विचारों, भावों, इच्छाओं और अनुभवों को दूसरों के सामने प्रकट करते हैं तथा दूसरों के विचारों और भावों को समझते हैं, उसे भाषा कहते हैं।

सरल शब्दों में: अपने मन की बात दूसरों तक पहुँचाने और दूसरों की बात समझने का माध्यम भाषा है।

उदाहरण से समझिए

एक बच्चा अपनी माँ से कहता है—“माँ, मुझे भूख लगी है।” बच्चा अपनी आवश्यकता को शब्दों के माध्यम से माँ तक पहुँचा रहा है। यहाँ हिंदी भाषा उसके विचार को व्यक्त करने का माध्यम बनी।

शिक्षक कहते हैं—“कल सभी विद्यार्थी समय पर विद्यालय आएँ।” शिक्षक ने भाषा की सहायता से विद्यार्थियों तक एक सूचना पहुँचाई।

इसी प्रकार विद्यार्थी प्रश्न पूछता है, मित्र आपस में बातचीत करते हैं, लेखक कहानी लिखता है और पाठक उसे पढ़कर लेखक के विचार समझता है। इन सभी स्थितियों में भाषा विचारों के आदान-प्रदान का काम करती है।

भाषा केवल बोलना नहीं है

कई बार विद्यार्थी यह समझ लेते हैं कि भाषा का अर्थ केवल बोलना है। ऐसा नहीं है। जब हम बोलते हैं, लिखते हैं, पढ़ते हैं या किसी की बात सुनकर उसका अर्थ समझते हैं, तब भी भाषा का ही प्रयोग होता है।

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भाषा की आवश्यकता क्यों होती है?

भाषा हमारे दैनिक जीवन का इतना स्वाभाविक हिस्सा है कि हम अक्सर उसके महत्व पर ध्यान ही नहीं देते। लेकिन भाषा के बिना परिवार, विद्यालय, समाज और ज्ञान की दुनिया की कल्पना करना बहुत कठिन है।

विचार व्यक्त करने के लिए

मनुष्य अपने विचारों को भाषा की सहायता से दूसरों तक पहुँचाता है।

उदाहरण—“हमें जल की बचत करनी चाहिए।”

इस वाक्य के माध्यम से वक्ता जल-संरक्षण से संबंधित अपना विचार व्यक्त कर रहा है।

भावनाएँ व्यक्त करने के लिए

भाषा के माध्यम से हम खुशी, दुःख, प्रेम, भय, क्रोध, आश्चर्य और उत्साह जैसे भाव व्यक्त करते हैं।

“आज मैं बहुत खुश हूँ।”
“तुम्हारी सफलता पर मुझे गर्व है।”
“मुझे यह समाचार सुनकर बहुत दुःख हुआ।”

जानकारी देने और प्राप्त करने के लिए

शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, समाचार-पत्र हमें घटनाओं की जानकारी देते हैं और पुस्तकें हमें विभिन्न विषयों का ज्ञान प्रदान करती हैं। यह सब भाषा के माध्यम से संभव होता है।

लोगों से संपर्क स्थापित करने के लिए

परिवार के सदस्यों, मित्रों, शिक्षकों और समाज के अन्य लोगों से संपर्क बनाए रखने में भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बातचीत, पत्र, ई-मेल और संदेश इसके सामान्य उदाहरण हैं।

ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए

यदि मनुष्य केवल बोल सकता और लिख नहीं सकता, तो पुराने ज्ञान को सुरक्षित रखना बहुत कठिन होता। लिखित भाषा के कारण साहित्य, इतिहास, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों का ज्ञान पुस्तकों और दस्तावेजों में सुरक्षित रखा जा सका है।

इसीलिए हम आज भी वर्षों या सदियों पहले लिखी गई रचनाओं को पढ़ सकते हैं।

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भाषा के रूप

हम भाषा का प्रयोग अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग ढंग से करते हैं। कभी किसी व्यक्ति से सीधे बात करते हैं और कभी अपनी बात लिखकर पहुँचाते हैं।

इस आधार पर भाषा के दो प्रमुख रूप हैं—

  • मौखिक भाषा
  • लिखित भाषा
आसान सूत्र:
बोलना + सुनना = मौखिक भाषा
लिखना + पढ़ना = लिखित भाषा
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मौखिक भाषा

जब हम किसी व्यक्ति से सीधे बातचीत करते हैं, शिक्षक की बात सुनते हैं, भाषण देते हैं या फोन पर किसी से बात करते हैं, तब हम भाषा के मौखिक रूप का प्रयोग कर रहे होते हैं।

जब हम अपने विचारों और भावों को बोलकर व्यक्त करते हैं तथा सामने वाला व्यक्ति उन्हें सुनकर समझता है, तो भाषा के उस रूप को मौखिक भाषा कहते हैं।

याद रखें: बोलना + सुनना = मौखिक भाषा

उदाहरण

राहुल ने मोहन से पूछा—“तुम आज विद्यालय क्यों नहीं आए थे?”
मोहन ने कहा—“मेरी तबीयत ठीक नहीं थी।”

राहुल और मोहन अपनी बात बोलकर व्यक्त कर रहे हैं और एक-दूसरे की बात सुनकर समझ रहे हैं। इसलिए यह मौखिक भाषा का उदाहरण है।

मौखिक भाषा के कुछ उदाहरण

  • दो मित्रों की बातचीत
  • शिक्षक द्वारा कक्षा में पढ़ाना
  • विद्यार्थी द्वारा कविता सुनाना
  • भाषण देना
  • कहानी सुनाना
  • प्रश्न पूछना और उत्तर देना
  • फोन पर बातचीत करना
  • रेडियो पर समाचार सुनना
  • मंच पर संवाद करना

मौखिक भाषा की प्रमुख विशेषताएँ

बोलने और सुनने पर आधारित: इसमें वक्ता बोलता है और श्रोता उसकी बात सुनता है।

तुरंत प्रतिक्रिया: आमने-सामने की बातचीत में श्रोता तुरंत उत्तर दे सकता है।

उच्चारण का महत्व: यदि कोई शब्द ठीक से नहीं बोला जाए, तो सुनने वाला उसका गलत अर्थ समझ सकता है।

स्वर और भाव का महत्व: आवाज के उतार-चढ़ाव से खुशी, दुःख, आश्चर्य और क्रोध जैसे भाव स्पष्ट हो सकते हैं।

उदाहरण—“तुम आ गए!” इस एक ही वाक्य को अलग-अलग स्वर में बोलने पर खुशी, आश्चर्य या नाराज़गी का भाव प्रकट हो सकता है।

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लिखित भाषा

यदि आपका मित्र आपके सामने नहीं है और आपको उससे कोई बात कहनी है, तो आप उसे संदेश या पत्र लिख सकते हैं। यहाँ आपकी बात ध्वनि के बजाय लिखित शब्दों के माध्यम से पहुँचती है।

जब हम अपने विचारों और भावों को लिखकर व्यक्त करते हैं तथा दूसरा व्यक्ति उन्हें पढ़कर समझता है, तो भाषा के उस रूप को लिखित भाषा कहते हैं।

याद रखें: लिखना + पढ़ना = लिखित भाषा

उदाहरण

रवि अपने मित्र को लिखता है— “मेरी गर्मी की छुट्टियाँ अगले सप्ताह से शुरू हो रही हैं। तुम कुछ दिनों के लिए मेरे घर अवश्य आना।”

रवि ने अपनी बात लिखकर व्यक्त की है और उसका मित्र उसे पढ़कर समझेगा। इसलिए यह लिखित भाषा है।

लिखित भाषा के उदाहरण

  • पुस्तक
  • पत्र
  • समाचार-पत्र
  • पत्रिका
  • कहानी और कविता
  • विद्यालय की उत्तर-पुस्तिका
  • सूचना-पट्ट
  • डायरी
  • ई-मेल
  • मोबाइल पर लिखा संदेश
  • वेबसाइट पर प्रकाशित लेख

लिखित भाषा की प्रमुख विशेषताएँ

लिखने और पढ़ने पर आधारित: इसमें विचार लिखे जाते हैं और पाठक उन्हें पढ़कर समझता है।

स्थायित्व: लिखित भाषा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

शुद्ध वर्तनी आवश्यक: लिखित भाषा में शब्दों को सही रूप में लिखना महत्वपूर्ण है।

गलत—परिक्षा
सही—परीक्षा

विराम-चिह्नों का महत्व: कई बार विराम-चिह्न बदलने से वाक्य का अर्थ भी बदल जाता है।

“रोको मत, जाने दो।”
“रोको, मत जाने दो।”

दोनों वाक्यों के शब्द लगभग समान हैं, लेकिन अल्पविराम के स्थान के कारण अर्थ बदल गया।

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मौखिक और लिखित भाषा में अंतर

आधार मौखिक भाषा लिखित भाषा
माध्यम बोलकर व्यक्त की जाती है। लिखकर व्यक्त की जाती है।
समझने का तरीका सुनकर समझी जाती है। पढ़कर समझी जाती है।
मुख्य क्रियाएँ बोलना और सुनना लिखना और पढ़ना
उदाहरण बातचीत, भाषण, फोन पर वार्तालाप पुस्तक, पत्र, ई-मेल, संदेश
स्थायित्व सामान्य बातचीत प्रायः स्थायी रूप में सुरक्षित नहीं रहती। लिखित सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।
मुख्य आवश्यकता स्पष्ट उच्चारण और उचित स्वर शुद्ध वर्तनी और सही विराम-चिह्न
बहुत आसान तरीके से:
मौखिक = मुँह से बोलना + कान से सुनना
लिखित = लिखना + आँखों से पढ़ना
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लिपि क्या है?

जब हम बोलते हैं, तो हमारे मुँह से ध्वनियाँ निकलती हैं। लेकिन ध्वनियाँ सुनाई तो देती हैं, उन्हें सीधे कागज पर सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसलिए मनुष्य ने ध्वनियों को निश्चित लिखित चिह्नों के माध्यम से व्यक्त करने की व्यवस्था विकसित की।

किसी भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए जिन निश्चित चिह्नों और नियमों का प्रयोग किया जाता है, उनकी व्यवस्थित पद्धति को लिपि कहते हैं।

सरल परिभाषा: भाषा को लिखने की निश्चित पद्धति को लिपि कहते हैं।

उदाहरण से समझिए

हम बोलते हैं—कमल

इसे लिखते समय हम क + म + ल वर्णों का प्रयोग करते हैं। ये लिखित चिह्न ध्वनियों को लिखित रूप प्रदान करते हैं।

इसी प्रकार हम घर, विद्यालय, पुस्तक, भारत जैसे शब्दों को लिखित चिह्नों की सहायता से कागज या स्क्रीन पर लिखते हैं।

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भाषा और लिपि में क्या अंतर है?

भाषा और लिपि का आपस में गहरा संबंध है, लेकिन दोनों एक नहीं हैं। भाषा हमारे विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है, जबकि लिपि भाषा को लिखित रूप प्रदान करती है।

याद रखने का आसान तरीका:
हम बोलते क्या हैं? — भाषा
हम लिखते कैसे हैं? — लिपि

उदाहरण के लिए हिंदी एक भाषा है, जबकि हिंदी को लिखने के लिए मुख्य रूप से देवनागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है।

एक उदाहरण

जब कोई व्यक्ति बोलता है—“मेरा भारत महान है।” तब वह हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहा है।

जब यही वाक्य मेरा भारत महान है। लिख दिया जाता है, तब हिंदी भाषा को लिखने के लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग किया गया है।

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देवनागरी लिपि

हिंदी भाषा को मुख्य रूप से देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। देवनागरी भारत की प्रमुख लिपियों में से एक है।

उदाहरण—भारत मेरा देश है।

यह हिंदी भाषा का वाक्य है और इसे देवनागरी लिपि में लिखा गया है।

हिंदी के अतिरिक्त संस्कृत और मराठी सहित कई भाषाओं के लेखन में भी देवनागरी का प्रयोग किया जाता है।

कुछ भाषाएँ और उनकी प्रमुख लिपियाँ

भाषा प्रमुख लिपि
हिंदी देवनागरी
संस्कृत देवनागरी
मराठी देवनागरी
अंग्रेज़ी रोमन
पंजाबी गुरुमुखी
उर्दू फ़ारसी-अरबी आधारित नस्तालीक़
गुजराती गुजराती
बंगाली बंगाली-असमिया

इससे स्पष्ट है कि भाषा और लिपि अलग-अलग होती हैं और एक ही लिपि का प्रयोग एक से अधिक भाषाओं को लिखने के लिए भी किया जा सकता है।

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देवनागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएँ

बाएँ से दाएँ लिखी जाती है

देवनागरी लिपि को बाईं ओर से दाईं ओर लिखा और पढ़ा जाता है।

उदाहरण—राम विद्यालय जाता है। →

स्वर और व्यंजन

देवनागरी में भाषा की ध्वनियों को व्यक्त करने के लिए स्वर और व्यंजन दोनों का प्रयोग किया जाता है।

स्वर: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ आदि
व्यंजन: क, ख, ग, घ, च, छ आदि

मात्राओं का प्रयोग

स्वर जब व्यंजनों के साथ जुड़ते हैं, तो उनके मात्रा-रूपों का प्रयोग किया जाता है।

क + ा = का
क + ि = कि
क + ी = की
क + ु = कु
क + ू = कू

शिरोरेखा

देवनागरी के अनेक वर्ण और शब्द ऊपर की एक सीधी रेखा से जुड़े दिखाई देते हैं। इस रेखा को शिरोरेखा कहते हैं।

उदाहरण—भारत, विद्यालय, कहानी, भाषा

ध्वनि और लिखित रूप में निकट संबंध

देवनागरी में सामान्यतः शब्दों का लिखित रूप उनके उच्चारण के काफी निकट होता है।

कमल → क + म + ल
नदी → न + द + ी

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व्याकरण क्या है?

प्रत्येक भाषा के कुछ निश्चित नियम होते हैं। इन नियमों के कारण हम भाषा को सही और स्पष्ट ढंग से बोल तथा लिख पाते हैं।

अब दो वाक्यों को देखिए—

सीता बाजार गई। — शुद्ध
सीता बाजार गया। — अशुद्ध

दूसरे वाक्य में सीता के अनुसार क्रिया का सही रूप नहीं आया है। ऐसे नियमों को समझने में व्याकरण हमारी सहायता करता है।

जिस शास्त्र से हमें किसी भाषा को शुद्ध रूप से बोलने, लिखने और समझने के नियमों का ज्ञान होता है, उसे व्याकरण कहते हैं।

सरल शब्दों में: भाषा के शुद्ध और व्यवस्थित प्रयोग के नियमों का ज्ञान कराने वाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है।
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व्याकरण की आवश्यकता क्यों होती है?

कल्पना कीजिए कि सड़क पर यातायात का कोई नियम न हो। कोई वाहन दाईं ओर से जाए, कोई बाईं ओर से और कोई कहीं भी रुक जाए। परिणाम क्या होगा? अव्यवस्था।

इसी प्रकार भाषा में भी यदि कोई नियम न हों, तो शब्दों और वाक्यों का अर्थ समझना कठिन हो सकता है। व्याकरण भाषा के प्रयोग को व्यवस्थित बनाता है।

शुद्ध भाषा बोलने में

व्याकरण हमें शब्दों और वाक्यों का मानक तथा उचित प्रयोग समझने में सहायता करता है।

अशुद्ध/अमानक—मेरे को पानी चाहिए।
मानक—मुझे पानी चाहिए।

शुद्ध भाषा लिखने में

अशुद्ध—लड़कियाँ खेल रहा है।
शुद्ध—लड़कियाँ खेल रही हैं।

यहाँ लड़कियाँ स्त्रीलिंग और बहुवचन है, इसलिए खेल रही हैं का प्रयोग उचित है।

अर्थ स्पष्ट करने में

राम ने रावण को मारा।
रावण ने राम को मारा।

दोनों वाक्यों में लगभग वही शब्द हैं, लेकिन उनकी भूमिका और क्रम बदलने से अर्थ पूरी तरह बदल गया।

भाषा को प्रभावशाली बनाने में

व्याकरण का ज्ञान होने पर हम अपने विचारों को अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित और प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं।

लिंग, वचन और काल का सही प्रयोग करने में

राम खेल रहा है।
सीता खेल रही है।
बच्चे खेल रहे हैं।

इन वाक्यों में कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार क्रिया का रूप बदल रहा है। इन नियमों का ज्ञान व्याकरण से मिलता है।

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व्याकरण के प्रमुख विभाग

भाषा को समझने के लिए व्याकरण में वर्ण, शब्द और वाक्य के स्तर पर अध्ययन किया जाता है। विद्यालय स्तर पर इसे मुख्य रूप से निम्न भागों के माध्यम से समझा जा सकता है।

वर्ण-विचार

इसमें वर्णों, ध्वनियों और वर्णमाला का अध्ययन किया जाता है।

जैसे—अ, आ, इ, ई, क, ख, ग, घ आदि।

स्वर और व्यंजन जैसे विषय वर्ण-विचार के अंतर्गत पढ़े जाते हैं।

शब्द-विचार

इसमें शब्दों की रचना, उनके रूप, भेद और प्रयोग का अध्ययन किया जाता है।

जैसे—घर, बच्चा, सुंदर, खेलना आदि।

संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, लिंग, वचन आदि विषयों का संबंध शब्द-विचार से है।

वाक्य-विचार

इसमें शब्दों को उचित क्रम और नियमों के अनुसार जोड़कर अर्थपूर्ण वाक्य बनाने, वाक्यों के प्रकार और उनके शुद्ध प्रयोग का अध्ययन किया जाता है।

उदाहरण—मोहन प्रतिदिन विद्यालय जाता है।

हिंदी व्याकरण में आगे क्या-क्या पढ़ेंगे?

  • वर्ण और वर्णमाला
  • शब्द-विचार
  • संज्ञा
  • सर्वनाम
  • विशेषण
  • क्रिया
  • लिंग
  • वचन
  • कारक
  • काल
  • अव्यय
  • उपसर्ग और प्रत्यय
  • संधि
  • समास
  • वाक्य-विचार
  • वाक्य-शुद्धि
  • विराम-चिह्न
  • पर्यायवाची और विलोम शब्द
  • मुहावरे और लोकोक्तियाँ
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भाषा, लिपि और व्याकरण में अंतर

अब भाषा, लिपि और व्याकरण—तीनों को एक ही उदाहरण से समझते हैं।

वाक्य है—“सीमा पुस्तक पढ़ रही है।”

भाषा

इस विचार को व्यक्त करने के लिए जिस माध्यम का प्रयोग किया गया है, वह हिंदी भाषा है।

लिपि

हिंदी के इस वाक्य को जिस पद्धति में लिखा गया है, वह देवनागरी लिपि है।

व्याकरण

व्याकरण के नियमों के कारण हम लिखते हैं— “सीमा पुस्तक पढ़ रही है।”

हम यह नहीं लिखते— “सीमा पुस्तक पढ़ रहा हैं।”

आधार भाषा लिपि व्याकरण
अर्थ विचारों और भावों को व्यक्त एवं समझने का माध्यम भाषा को लिखने की पद्धति भाषा के शुद्ध प्रयोग के नियमों का ज्ञान
कार्य विचारों का आदान-प्रदान भाषा को लिखित रूप देना भाषा को शुद्ध और व्यवस्थित बनाना
उदाहरण हिंदी देवनागरी लिंग, वचन, काल आदि के नियम
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झटपट पुनरावृत्ति

  • भाषा विचारों, भावों और इच्छाओं को व्यक्त करने तथा समझने का माध्यम है।
  • भाषा के दो प्रमुख रूप हैं—मौखिक और लिखित।
  • बोलना + सुनना = मौखिक भाषा
  • लिखना + पढ़ना = लिखित भाषा
  • भाषा को लिखने की निश्चित पद्धति लिपि कहलाती है।
  • हिंदी भाषा मुख्य रूप से देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।
  • देवनागरी लिपि को बाएँ से दाएँ लिखा जाता है।
  • देवनागरी में स्वर, व्यंजन और मात्राओं का प्रयोग होता है।
  • देवनागरी के अनेक शब्दों में ऊपर दिखाई देने वाली रेखा शिरोरेखा कहलाती है।
  • भाषा और लिपि एक नहीं हैं।
  • भाषा के शुद्ध और व्यवस्थित प्रयोग के नियमों का ज्ञान व्याकरण से होता है।
  • व्याकरण के अध्ययन में वर्ण, शब्द और वाक्य से संबंधित नियमों को समझा जाता है।
एक लाइन में पूरा अध्याय:
विचार व्यक्त करने का माध्यम = भाषा
भाषा को लिखने की पद्धति = लिपि
भाषा को शुद्ध रखने के नियम = व्याकरण
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अभ्यास प्रश्न

भाषा किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस माध्यम से हम अपने विचारों, भावों, इच्छाओं और अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाते हैं तथा दूसरों की बात समझते हैं, उसे भाषा कहते हैं।

भाषा के दो प्रमुख रूप कौन-कौन से हैं?

उत्तर: भाषा के दो प्रमुख रूप मौखिक भाषा और लिखित भाषा हैं।

मौखिक भाषा किसे कहते हैं?

उत्तर: जब विचारों और भावों को बोलकर व्यक्त किया जाता है तथा सुनकर समझा जाता है, तो उसे मौखिक भाषा कहते हैं।

लिखित भाषा किसे कहते हैं?

उत्तर: जब विचारों और भावों को लिखकर व्यक्त किया जाता है तथा पढ़कर समझा जाता है, तो उसे लिखित भाषा कहते हैं।

लिपि किसे कहते हैं?

उत्तर: भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप में व्यक्त करने की निश्चित और व्यवस्थित पद्धति को लिपि कहते हैं।

हिंदी भाषा किस लिपि में लिखी जाती है?

उत्तर: हिंदी भाषा मुख्य रूप से देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

देवनागरी लिपि की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: देवनागरी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, इसमें स्वर-व्यंजन और मात्राओं का प्रयोग होता है तथा इसके अनेक वर्ण और शब्द शिरोरेखा से जुड़े दिखाई देते हैं।

व्याकरण किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस शास्त्र से किसी भाषा को शुद्ध रूप से बोलने, लिखने और समझने के नियमों का ज्ञान होता है, उसे व्याकरण कहते हैं।

व्याकरण की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर: व्याकरण भाषा को शुद्ध, स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने में सहायता करता है। इससे हम लिंग, वचन, काल, शब्द और वाक्यों का सही प्रयोग सीखते हैं।

भाषा, लिपि और व्याकरण में क्या अंतर है?

उत्तर: भाषा विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है, लिपि भाषा को लिखने की पद्धति है और व्याकरण भाषा के शुद्ध तथा व्यवस्थित प्रयोग के नियमों का ज्ञान कराता है।

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महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

अपने विचारों और भावों को व्यक्त करने के माध्यम को क्या कहते हैं?

  1. वर्ण
  2. लिपि
  3. भाषा
  4. व्याकरण

सही उत्तर: C — भाषा

भाषा के दो प्रमुख रूप कौन-से हैं?

  1. मौखिक और लिखित
  2. स्वर और व्यंजन
  3. शब्द और वाक्य
  4. भाषा और लिपि

सही उत्तर: A — मौखिक और लिखित

फोन पर बातचीत करना किसका उदाहरण है?

  1. लिखित भाषा
  2. मौखिक भाषा
  3. लिपि
  4. व्याकरण

सही उत्तर: B — मौखिक भाषा

निम्नलिखित में से लिखित भाषा का उदाहरण कौन-सा है?

  1. भाषण देना
  2. फोन पर बातचीत
  3. कहानी सुनाना
  4. पत्र लिखना

सही उत्तर: D — पत्र लिखना

भाषा को लिखने की निश्चित पद्धति को क्या कहते हैं?

  1. व्याकरण
  2. लिपि
  3. वर्ण
  4. वाक्य

सही उत्तर: B — लिपि

हिंदी की प्रमुख लिपि कौन-सी है?

  1. गुरुमुखी
  2. रोमन
  3. गुजराती
  4. देवनागरी

सही उत्तर: D — देवनागरी

देवनागरी लिपि किस दिशा में लिखी जाती है?

  1. बाएँ से दाएँ
  2. दाएँ से बाएँ
  3. ऊपर से नीचे
  4. नीचे से ऊपर

सही उत्तर: A — बाएँ से दाएँ

भाषा के शुद्ध प्रयोग के नियमों का ज्ञान किससे होता है?

  1. साहित्य
  2. लिपि
  3. व्याकरण
  4. वर्णमाला

सही उत्तर: C — व्याकरण

निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य शुद्ध है?

  1. लड़कियाँ खेल रहा है।
  2. लड़कियाँ खेल रही है।
  3. लड़कियाँ खेल रही हैं।
  4. लड़कियाँ खेल रहे है।

सही उत्तर: C — लड़कियाँ खेल रही हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. देवनागरी एक भाषा है।
  2. हिंदी एक लिपि है।
  3. व्याकरण और लिपि एक ही हैं।
  4. हिंदी भाषा है और देवनागरी उसकी प्रमुख लिपि है।

सही उत्तर: D — हिंदी भाषा है और देवनागरी उसकी प्रमुख लिपि है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – भाषा और व्याकरण

भाषा किसे कहते हैं?

अपने विचारों, भावों, इच्छाओं और अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाने तथा दूसरों की बात समझने के माध्यम को भाषा कहते हैं।

भाषा के कितने प्रमुख रूप होते हैं?

भाषा के दो प्रमुख रूप होते हैं—मौखिक भाषा और लिखित भाषा।

मौखिक भाषा और लिखित भाषा में मुख्य अंतर क्या है?

मौखिक भाषा बोलकर व्यक्त और सुनकर समझी जाती है, जबकि लिखित भाषा लिखकर व्यक्त और पढ़कर समझी जाती है।

लिपि क्या होती है?

किसी भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप में व्यक्त करने की निश्चित और व्यवस्थित पद्धति को लिपि कहते हैं।

हिंदी भाषा की लिपि कौन-सी है?

हिंदी भाषा मुख्य रूप से देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

देवनागरी लिपि की मुख्य विशेषता क्या है?

देवनागरी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है। इसमें स्वर, व्यंजन, मात्राओं और शिरोरेखा का प्रयोग महत्वपूर्ण है।

भाषा और लिपि में क्या अंतर है?

भाषा विचारों को व्यक्त करने का माध्यम है, जबकि लिपि उस भाषा को लिखने की पद्धति है।

व्याकरण किसे कहते हैं?

किसी भाषा को शुद्ध और व्यवस्थित रूप से बोलने, लिखने तथा समझने के नियमों का ज्ञान कराने वाले शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।

व्याकरण पढ़ना क्यों आवश्यक है?

व्याकरण हमें भाषा में शब्दों, लिंग, वचन, क्रिया और वाक्यों का सही प्रयोग करना सिखाता है तथा भाषा को स्पष्ट और शुद्ध बनाता है।

भाषा, लिपि और व्याकरण को एक उदाहरण से कैसे समझें?

हिंदी विचार व्यक्त करने की भाषा है, देवनागरी उसे लिखने की लिपि है और हिंदी को शुद्ध रूप से बोलने-लिखने के नियमों का ज्ञान व्याकरण देता है।

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