दो गौरैया Class - 8 Hindi Notes

दो गौरैया पाठ के प्रश्न उत्तर | अभ्यास कार्य, व्याकरण और गतिविधि सहित


यहाँ गौरैया पाठ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल, क्रमबद्ध और परीक्षा-उपयोगी उत्तर दिए गए हैं। बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही उत्तर के आगे ★ तथा व्यंग्य वाले वाक्यों में ✓ चिह्न लगाया गया है।

क्या आप दो गौरैया पाठ का NCERT प्रश्नों का उत्तर खोज रहे हैं? यदि हाँ तो रुक जाइए यहाँ  इस लेख में दो गौरैया पाठ के बहुविकल्पीय प्रश्न, मिलान, विचार और अभिव्यक्ति, अनुमान और कल्पना, संवाद-अभिनय, व्याकरण, तालिका, हास्य-व्यंग्य तथा विश्व गौरैया दिवस से जुड़े सभी उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं।

Table of Contents

1

बहुविकल्पीय प्रश्न

(क) निम्नलिखित (नीचे लिखे हुए) प्रश्नों के उचित (सही) उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए। इनमें कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि — ( प्रश्न में आपको बताना है कि पिताजी ने ऐसा क्यों कहा उसका कारण क्या था ?) 

  • घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
  • घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं 
  • पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
  • घर में विभिन्न पक्षी और जानवर आते-जाते रहते हैं 
उत्तर: ★ घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं★ घर में विभिन्न पक्षी जानवर आते-जाते रहते हैंयहाँ दोनों विकल्प सही है क्योंकि दोनों कथनों का भाव अथवा अर्थ एक ही है इसलिए यहाँ दोनों विकल्प सही है अतः आप दोनों विकल्प पर तारा बनाइए

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(2) कहानी में 'घर के असली मालिक' किसे कहा गया है? ( प्रश्न में आपको बताना है कि घर का असली मालिक कौन हैं?)

  • माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
  • लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
  • जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे 
  • मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
उत्तर: ★ जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थेआपको याद होगा कि लेखक भीष्म साहनी जी ने घर में पक्षियों, चूहों तथा बिल्ली के होने पर उनको ऐसा प्रतीत होता था की घर तो हमने बनाया है किन्तु इसमें रहने वाले पक्षी, जानवर एवं अन्य छोटे बड़े जीव हैं। हम तो इस घर के मेहमान हैं अर्थात् जीव जंतुओं को जो उस घर में रहते थे उन्हें ही असली मालिक खा गया है 

(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं? (इस प्रश्न में आपको बताना है कि गौरैया को लेकर माँ और पिताजी की क्या प्रतिक्रियाएँ थी उनके क्या विचार थे ?)

  • दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
  • पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया 
  • दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
  • माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
उत्तर: ★ पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।

Imp. माँ ने उनकी मदद नहीं की बल्कि मजाक उड़ाया।

(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुस्कुराती और मजाक करतीं क्यों?

  • माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
  • माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे 
  • माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी 
  • माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
उत्तर: ★ माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे ★ माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी

(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?

  • दूसरों पर निर्भर रहना
  • असफलताओं से हार मान लेना
  • अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना 
  • संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
उत्तर: ★ अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
2

मिलकर करें — मिलान

(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।

क्रम वाक्य सही अर्थ
1. वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोग उसे संगीत की तरह सराहते थे।
2. आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
3. वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4. वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5. पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
6. इतने में रात पड़ गई। कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7. जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों।

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विचार और अभिव्यक्ति

(क) "अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।"

उत्तर: माँ यह अच्छी तरह समझ गई थीं कि चिड़ियों ने पंखे पर अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। उन्होंने उसमें अंडे भी दे दिए होंगे। अब तो वे अपने घर यानी घोंसले को छोड़कर कहीं नहीं जाने वालीं।

(ख) "एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।"

उत्तर: पिताजी को यह भ्रम था कि अगर दरवाज़े और रोशनदान बंद कर दिए जाएं, तो चिड़ियाँ परेशान होकर अपने आप ही हार मान लेंगी और हमेशा के लिए चली जाएंगी।

(ग) "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।"

उत्तर: यह वाक्य पिताजी के चरम गुस्से को दर्शाता है। वे तंग आ चुके थे और उन्हें लगा कि जब तक चिड़ियों का ठिकाना यानी घोंसला मौजूद रहेगा, वे आती रहेंगी। इसलिए उसे जड़ से मिटाना ही एकमात्र उपाय है।
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पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए

(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा — घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?

उत्तर: मुझे इस कहानी में 'माँ' का पात्र सबसे अच्छा लगा। उनका स्वभाव बहुत शांत और पशु-पक्षियों के प्रति दयालु था। उन्होंने बेजुबान चिड़ियों को घर से नहीं निकाला और अंत में सूझबूझ दिखाते हुए दरवाजे खोल दिए ताकि माँ-बाप चिड़िया अपने बच्चों से मिल सकें।

(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?

उत्तर: चिड़िया ने अपना घोंसला घर की बैठक में लगे पंखे के ऊपरी हिस्से यानी गोले में बनाया। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वह स्थान काफी ऊँचा था, जहाँ उनके अंडे और बच्चे बिल्ली या अन्य खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकते थे।

(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।

उत्तर: जी हाँ, वे भी परिवार का महत्व बहुत अच्छी तरह समझते हैं। जब पिताजी लाठी से घोंसला तोड़ रहे थे और घर के सारे रास्ते बंद थे, तब भी दोनों गौरैयाँ अपनी जान जोखिम में डालकर अपने बच्चों के पास बार-बार लौट रही थीं।

(घ) "अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।" इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?

उत्तर: इस कथन से पता चलता है कि पिताजी बहुत ही ज़िद्दी, दृढ़-निश्चयी और अपनी बात पर अड़े रहने वाले इंसान थे।

(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में क्या सा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?

उत्तर: शुरुआत में गौरैयाँ निडर होकर खुशी-खुशी मल्हार गा रही थीं। लेकिन जब पिताजी ने लाठी से घोंसला तोड़ना शुरू किया, तो वे सहम गईं और उन्होंने गाना बंद कर दिया। वे डर के कारण उदास और गुमसुम होकर दीवार पर बैठ गई थीं।

(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।

उत्तर:
  1. बंद दरवाजों के नीचे बची हुई खाली जगह से।
  2. रोशनदान के टूटे हुए शीशे से।

(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?

उत्तर: यह कहानी स्वयं लेखक भीष्म साहनी सुना रहे हैं। कहानी में 'मैं', 'पिताजी' और 'माँ' जैसे शब्दों के इस्तेमाल से साफ़ पता चलता है कि वे अपने बचपन की कोई घटना बयां कर रहे हैं।

(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?

उत्तर: माँ एक महिला की ममता को समझती थीं। उन्हें अंदाजा हो गया था कि गौरैयों ने घोंसले में अंडे दे दिए हैं, और कोई भी माँ अपने अंडों या बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाती।
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अनुमान और कल्पना से

(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?

उत्तर: मैं उन चिड़ियों को बिल्कुल नहीं भगाता। मैं उन्हें आराम से घोंसला बनाने देता और उनके लिए किसी कोने में थोड़ा दाना और पानी भी रख देता।

(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?

उत्तर: यदि घर में चूहा, मच्छर या कॉकरोच आ जाता, तो घर वाले उन्हें झाड़ू या दवा से तुरंत मार भगाते, क्योंकि उनसे बीमारियाँ फैलती हैं। लेकिन यदि बिल्ली या कबूतर आता, तो शायद लोग उन्हें थोड़ा डराकर भगाते या उन्हें कुछ खाने को दे देते।

(ग) "मैं अवाक उनकी ओर देखता रहा।" लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?

उत्तर: लेखक को यह देखकर हैरानी हुई कि टूटते हुए घोंसले में से नन्हीं-नन्हीं चिड़ियों के बच्चे बाहर झाँक रहे थे। लेखक को ज़रा भी उम्मीद नहीं थी कि घोंसले के अंदर बच्चे भी हो सकते हैं।

(घ) "माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।" माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?

उत्तर: माँ जानती थीं कि बेज़ुबान पक्षियों का घर उजाड़ना गलत है। इसके अलावा, एक छोटी सी चिड़िया को भगाने के लिए पिताजी का लाठी लेकर कूदना और हास्यास्पद हरकतें करना माँ को बहुत मजाकिया लग रहा था।

(ङ) किसी एक अपरिचित व्यक्ति/प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए।

उत्तर: यदि कोई कुत्ता बार-बार अपनी दुम हिला रहा है, ज़मीन सूँघ रहा है और दरवाज़े की तरफ देख रहा है, तो उसके इस व्यवहार से हम अनुमान लगा सकते हैं कि उसे भूख लगी है या वह बाहर जाना चाहता है।

(च) "पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।" सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?

उत्तर: 'सराय' यात्रियों के ठहरने का एक अस्थायी स्थान होता है, जहाँ से किसी का कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता। दूसरी ओर, 'घर' वह जगह होती है जहाँ इंसान अपने परिवार के साथ स्थायी रूप से रहता है, जहाँ प्रेम, अपनत्व और भावनाएं जुड़ी होती हैं।
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संवाद और अभिनय

(क) नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?

उत्तर: "चीं-चीं! हमें बहुत डर लग रहा है। ये हमारे घर को डंडे से क्यों तोड़ रहे हैं? हमारी माँ और पिताजी कहाँ चले गए? हमें भूख लगी है!"

(ख) घोंसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?

उत्तर: "देखो ज़रा! यह इंसान नीचे खड़ा होकर क्या अजीब-अजीब हरकतें कर रहा है। कभी ताली बजा रहा है, कभी नाच रहा है। क्या यह कोई खेल दिखा रहा है?"

(ग) जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?

उत्तर: "वाह! यह घर तो बहुत बड़ा और सुरक्षित लग रहा है। देखो, वह ऊपर पंखे की जगह हमारे बच्चों के लिए बिल्कुल सही रहेगी। चलो, यहीं अपना घर बनाते हैं।"

(घ) गौरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?

उत्तर:
बच्चे: "माँ, तुम कहाँ चली गई थीं? एक आदमी ने हमारा घर तोड़ दिया, हम बहुत डर गए थे।"
माँ-बाप: "डरो मत बच्चों! हम आ गए हैं। हम तुम्हारे लिए दाना लाए हैं, जल्दी से अपना मुँह खोलो और खा लो।"

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बदली कहानी

मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।

उत्तर: यदि अंडों से बच्चे न निकले होते, तो घोंसला तोड़ते समय उसमें से कोई चीं-चीं की आवाज़ नहीं आती। पिताजी को कोई दया नहीं आती और वे लाठी से पूरा घोंसला नोचकर ज़मीन पर गिरा देते। माता-पिता गौरैयाँ अपना उजड़ा हुआ घर देखकर निराश हो जातीं और हमेशा के लिए वह मकान छोड़कर कहीं और चली जातीं। पिताजी इसे अपनी जीत मानकर खुश होते, लेकिन कहानी का अंत बहुत ही दुखद होता।

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व्याकरण — क्रिया-विशेषण

इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

(क) झिड़ककर: गलती करने पर पिताजी ने मुझे झिड़ककर चुप करा दिया।

(ख) गंभीरता से: डॉक्टर ने मेरी बीमारी की रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से देखा।

(ग) गुस्से में: अपना नया फोन टूटा हुआ देखकर राम गुस्से में बड़बड़ाने लगा।

अन्य क्रिया-विशेषण शब्द और वाक्य

  • धीरे से: उसने परीक्षा हॉल में धीरे से अपने दोस्त से पेन माँगा।
  • चिल्लाकर: सड़क पर खेलते हुए बच्चा चिल्लाकर रोने लगा।

9

मैंने पढ़ा

कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे जैसे कौन-कौन से काम करते थे?

(क) बिल्ली — 'फिर आऊँगी' कहकर चली जाती है।

(ख) चमगादड़ — शाम होते ही कमरों के आर-पार कसरत करने लगते हैं।

(ग) बूढ़ा चूहा — उसे सर्दी बहुत लगती है, इसलिए वह अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है।

(घ) दूसरा चूहा — उसे गर्मी लगती है, इसलिए वह बाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठ जाता है।

(ङ) दो गौरैयाँ — अंदर घुसकर मकान का ऐसे निरीक्षण करती हैं मानो घर किराए पर लेना हो और मजे से बैठी 'मल्हार' गाती हैं।

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मात्रा बदलने से अर्थ परिवर्तन

इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

नाच — मुझे शादी में उसका नाच यानी नृत्य बहुत पसंद आया।

नाचा — बारिश देखकर मोर जंगल में नाचा

नचा — मदारी ने डुगडुगी बजाकर बंदर को नचा दिया।

हार — मैंने अपनी बहन को जन्मदिन पर मोतियों का हार दिया।

हरा — पेड़ों की पत्तियों का रंग हरा होता है।

हारा — वह लड़का दौड़ प्रतियोगिता में हारा नहीं, बल्कि जीता है।

पिता — मेरे पिता जी बहुत ही दयालु स्वभाव के हैं।

पीता — मेरा छोटा भाई रोज़ सुबह एक गिलास दूध पीता है।

चूक — परीक्षा में जल्दीबाज़ी के कारण मुझसे एक बड़ी चूक यानी गलती हो गई।

चुक — महीने के अंत तक मेरे सारे पैसे चुक गए।

नीचा — हमें कभी किसी गरीब को नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

नीचे — मेरी किताब मेज़ के नीचे गिर गई है।

सहसा — हम खेल रहे थे कि सहसा यानी अचानक तेज़ बारिश होने लगी।

साहस — उस छोटे बच्चे ने डूबते हुए कुत्ते को बचाकर बहुत साहस का काम किया।


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कहानी की विशेषताएँ

(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।

क्रम विशेषता उदाहरण
1. हास्य-व्यंग्य माँ का ताना मारना - "छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!"
2. मानवीकरण चमगादड़ों का कमरों में कसरत करना और चिड़ियों का मकान का निरीक्षण करना।
3. बाल-मनोविज्ञान लेखक का दरवाज़े बंद करना और अवाक् होकर चुपचाप घटनाओं को देखना।
4. हृदय परिवर्तन पिताजी का लाठी रख देना और चिड़ियों के बच्चों को देखकर मुस्कुराना।
5. जीव-प्रेम / करुणा घोंसला उजड़ने से बचने के बाद माँ का दया दिखाते हुए तुरंत सारे दरवाज़े खोल देना।
6. दृढ़ निश्चय पिताजी का हार न मानना और बार-बार लाठी लेकर गौरैयों पर हमला करना।
7. परिवार का महत्व माता-पिता गौरैया का जान जोखिम में डालकर भी बच्चों के पास आना।
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आपकी बात

(क) आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?

उत्तर: मैंने पक्षियों को तिनके इकट्ठा करते, पानी पीते और अपने बच्चों की चोंच में दाना डालते हुए देखा है। उनके व्यवहार में मुझे प्रेम, सतर्कता और अपने परिवार के प्रति गहरी सुरक्षा का भाव दिखाई देता है।

(ख) क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?

उत्तर: हाँ, मैं अपने छोटे भाई के साथ अपना कमरा और कंप्यूटर साझा करता हूँ। कभी-कभी जब हम दोनों को एक ही समय पर कंप्यूटर की ज़रूरत होती है, तो हम झगड़ने के बजाय समय को आपस में बाँट लेते हैं ताकि दोनों का काम हो जाए।

(ग) क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?

उत्तर: हाँ, पहले मुझे गली के कुत्तों से बहुत डर लगता था। लेकिन एक दिन मैंने एक कुत्ते को एक छोटे से बिल्ली के बच्चे को सर्दी से बचाते हुए देखा। उस दिन से कुत्तों के प्रति मेरा नज़रिया बदल गया और अब मैं उन्हें बिस्किट भी खिलाता हूँ।

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चिड़ियों का घोंसला

(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूँढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए।

क्रम संख्या घोंसले को कहाँ देखा घोंसला किन चीजों से बनाया गया था घोंसला खाली था या नहीं घोंसला किस पक्षी का था
1. घर के छज्जे यानी बालकनी पर सूखी घास, तिनके और रुई से खाली नहीं था कबूतर
2. पेड़ की ऊँची डाल पर लटकता हुआ पतले तार, लंबी घास और धागों से खाली नहीं था बया
3. बिजली के मीटर के पास खाली जगह में छोटे तिनके, पंख और ऊन के टुकड़ों से खाली था गौरैया
4. पुराने खंडहर की दीवार में मिट्टी, कीचड़ और सूखे पत्तों से खाली था अबाबील
5. नीम के पेड़ की टहनी पर टहनियों और मोटे तिनकों से, प्याले के आकार का खाली नहीं था कौवा
नोट: मल्हार और संगीत से जुड़ी गतिविधियाँ छात्र स्वयं इंटरनेट और प्रस्तुति के माध्यम से कर सकते हैं।
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हास्य-व्यंग्य

(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।

उत्तर:
  1. "इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।"
  2. "तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।"
  3. "चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?"

(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य 'व्यंग्य' कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।

उत्तर: ✓ "छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!" ✓ "तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।"

इन वाक्यों में माँ सीधे तौर पर कुछ न कहकर, मज़ाक के रूप में पिताजी के असफल प्रयासों पर तंज कस रही हैं।

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झरोखे से — विश्व गौरैया दिवस

जानकारी: इस अंतिम भाग में बताया गया है कि आधुनिक इमारतों, शहरीकरण और जहरीले पेट्रोल आदि के कारण गौरैयों को अपना घर बनाने की जगह नहीं मिल रही है। उनकी संख्या तेज़ी से घट रही है। इसीलिए भारत सरकार यानी पर्यावरण मंत्रालय ने लोगों में जागरूकता फैलाने और इन नन्हीं चिड़ियों को बचाने के लिए हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाने की घोषणा की है।