पद – मीरा: सारांश, शब्दार्थ, भावार्थ, प्रश्न-उत्तर एवं MCQ
मुख्य विषय: भगवान की भक्तवत्सलता, श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, निष्काम सेवा, पूर्ण समर्पण और दर्शन की तीव्र अभिलाषा।
मीरा बाई का पद, Meera Ka Pad class 10, पद - मीरा भाई कक्षा 10, पाठ का शब्दार्थ, भावार्थ, NCERT Question Answer

पाठ परिचय
प्रस्तुत पाठ में मीराबाई के दो भक्तिपरक पद संकलित हैं। पहले पद में मीरा भगवान श्रीकृष्ण की भक्तवत्सलता का वर्णन करते हुए उनसे अपने दुःख दूर करने की प्रार्थना करती हैं। वे द्रौपदी, प्रह्लाद और गजराज के पौराणिक प्रसंगों द्वारा बताती हैं कि भगवान संकट के समय अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी पाने की इच्छा व्यक्त करती हैं। यह चाकरी कोई सांसारिक नौकरी नहीं, बल्कि सेवा, स्मरण और दर्शन के माध्यम से प्रभु के निकट रहने का साधन है। पदों में राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा, गीतात्मकता, माधुर्य और भक्ति रस का सुंदर समन्वय है।
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SAAKHI (कबीर – साखी) Class 10 सरल व्याख्या, भावार्थ और महत्वपूर्ण प्रश्न
कवयित्री परिचय – मीराबाई

मीराबाई (लगभग 1498–1546) मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कृष्णभक्त कवयित्री थीं। उनका जन्म राजस्थान के मेड़ता क्षेत्र के कुड़की गाँव में माना जाता है। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण को अपना आराध्य और सर्वस्व मानती थीं। उनका विवाह मेवाड़ के राजकुमार भोजराज से हुआ, किंतु सांसारिक वैभव उन्हें कृष्ण-भक्ति से अलग नहीं कर सका।
मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की है, जिसमें वे श्रीकृष्ण को प्रियतम और स्वयं को उनकी दासी मानती हैं। सामाजिक विरोध और जीवन के कष्टों के बावजूद उनकी आस्था अडिग रही। उनके पद सरल, गेय और भावपूर्ण हैं तथा उनमें राजस्थानी, ब्रज और गुजराती के शब्द मिलते हैं।
- प्रमुख रचनाएँ: मीराबाई की पदावली, नरसी जी का मायरा, गीत गोविंद की टीका।
- भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा।
- विशेषता: कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, समर्पण और भक्ति।
पाठ का विस्तृत सारांश
पहले पद में मीराबाई प्रभु से कहती हैं—हे हरि! आप अपने भक्तों की पीड़ा दूर करने वाले हैं, इसलिए मेरा संकट भी हर लीजिए। वे भगवान को याद दिलाती हैं कि जब भरी सभा में द्रौपदी की लाज संकट में थी, तब उन्होंने वस्त्र बढ़ाकर उसकी रक्षा की। भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए नरसिंह रूप धारण किया और हिरण्यकशिपु का अंत किया। इसी प्रकार मगरमच्छ के चंगुल में फँसे गजराज की पुकार सुनकर उसे भी बचाया। इन उदाहरणों के आधार पर मीरा पूर्ण विश्वास से अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं।
दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण से स्वयं को चाकर रखने की विनती करती हैं। वे वृंदावन में बगीचे लगाना, कुंज-गलियों में कृष्ण की लीलाओं का गान करना और प्रतिदिन उनके दर्शन करना चाहती हैं। प्रभु की सेवा से उन्हें तीन अमूल्य लाभ मिलेंगे—दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति। वे मोर मुकुट, पीतांबर, वैजयंती माला और मुरली धारण किए कृष्ण के मनमोहक रूप की कल्पना करती हैं। अंत में आधी रात यमुना तट पर दर्शन देने की प्रार्थना करते हुए बताती हैं कि उनका हृदय प्रभु-मिलन के लिए अत्यंत अधीर है।
SAAKHI (कबीर – साखी) Class 10 सरल व्याख्या, भावार्थ और महत्वपूर्ण प्रश्न
मनुष्यता Class 10 शब्दार्थ, सरल भावार्थ और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर
पहला पद – पद, शब्दार्थ और भावार्थ
हरि आप हरो जन री भीर
शब्दार्थ
भावार्थ
मीराबाई भगवान श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि वे उनकी पीड़ा दूर करें। जिस प्रकार उन्होंने द्रौपदी के वस्त्र बढ़ाकर उसकी लाज बचाई, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार धारण किया और मगरमच्छ के चंगुल में फँसे गजराज को बचाया, उसी प्रकार वे अपनी दासी मीरा के संकट भी हर लें। पद में भगवान की करुणा, भक्तवत्सलता और भक्त का उन पर अटूट विश्वास व्यक्त हुआ है।
तोप Class 10 शब्दार्थ, सरल भावार्थ और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर
दूसरा पद – पद, शब्दार्थ और भावार्थ
स्याम म्हाने चाकर राखो जी
शब्दार्थ
भावार्थ
मीरा श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे उन्हें अपनी सेविका बना लें। सेवा करते हुए वे वृंदावन में बगीचे लगाएंगी, प्रतिदिन कृष्ण के दर्शन करेंगी और कुंज-गलियों में उनकी लीलाओं का गान करेंगी। इस चाकरी के बदले उन्हें दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति की जागीर मिलेगी—यही उनके लिए सबसे बड़ा धन है।
वे मोर मुकुट, पीतांबर, वैजयंती माला और मुरली से सजे, वृंदावन में गाय चराते श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप का वर्णन करती हैं। वे महल और बगीचे बनाकर, कुसुम्बी साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन पाना चाहती हैं। अंत में वे आधी रात यमुना तट पर प्रभु-दर्शन की विनती करती हैं, क्योंकि उनका हृदय कृष्ण से मिलने के लिए अत्यंत व्याकुल है।
प्रश्न-अभ्यास: प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
उत्तर: मीरा द्रौपदी की लाज बचाने, भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह अवतार लेने और गजराज को मगरमच्छ से मुक्त कराने के प्रसंग याद दिलाती हैं। इन उदाहरणों के आधार पर वे स्वयं को प्रभु की दासी बताकर अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करती हैं।
प्रश्न 2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं?
उत्तर: मीरा श्याम की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं ताकि वे प्रभु के निकट रह सकें, प्रतिदिन उनके दर्शन और स्मरण कर सकें तथा उनकी लीलाओं का गुणगान कर सकें। उनके लिए यह सेवा सच्ची भक्ति और आध्यात्मिक आनंद पाने का श्रेष्ठ साधन है।
प्रश्न 3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
उत्तर: मीरा ने श्रीकृष्ण के सिर पर मोर मुकुट, शरीर पर पीतांबर, गले में वैजयंती माला और हाथ में मुरली का वर्णन किया है। वृंदावन में गाय चराते हुए उनका रूप सरल, आकर्षक और मनमोहक दिखाई देता है।
प्रश्न 4. मीराबाई की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मीराबाई की भाषा सरल, मधुर, सहज और भावपूर्ण है। उनके पदों में राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा तथा लोकभाषा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। शैली गीतात्मक है और भक्ति रस के साथ माधुर्य, लय तथा आत्मीयता दिखाई देती है।
प्रश्न 5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?
उत्तर: मीरा श्रीकृष्ण की सेविका बनकर वृंदावन में बगीचे लगाने, उनकी लीलाओं का गान करने, महल और बगीचे बनवाने, सुंदर कुसुम्बी साड़ी पहनकर दर्शन करने तथा दिन-रात उनका स्मरण करने को तैयार हैं।
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
1. “हरि आप हरो जन री भीर… भगत कारण रूप नरहरि…”
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
उत्तर: इन पंक्तियों में द्रौपदी और प्रह्लाद के पौराणिक प्रसंगों द्वारा भगवान की भक्तवत्सलता तथा करुणा व्यक्त हुई है। राजस्थानी मिश्रित सरल भाषा, गीतात्मकता, अनुप्रास की छटा और भक्ति रस इनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।
2. “बूढ़तो गजराज राख्यो… हरो म्हारी भीर।”
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।
उत्तर: गजेन्द्र-मोक्ष के प्रसंग द्वारा भगवान का दयालु और संकटमोचक रूप प्रस्तुत हुआ है। मीरा का दास्य भाव, विनम्रता और पूर्ण समर्पण प्रभावशाली ढंग से व्यक्त हुआ है। भाषा सरल व लोकभाषा प्रधान है और भक्ति रस की प्रधानता है।
3. “चाकरी में दरसण पास्यूँ… तीनूं बाताँ सरसी।”
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
उत्तर: यहाँ सेवा के प्रतिफल के रूप में दर्शन, स्मरण और भक्ति को सांसारिक वेतन, खर्च तथा जागीर के रूपक में प्रस्तुत किया गया है। इससे मीरा का आध्यात्मिक जीवन-दृष्टिकोण, निष्काम सेवा और पूर्ण समर्पण व्यक्त होता है। भाषा मधुर, सहज और राजस्थानी मिश्रित है।
10 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
पहले स्वयं सही विकल्प चुनें, फिर नीचे दिए गए उत्तर से मिलाएँ।
मीरा ने पहले पद में किससे अपनी पीड़ा दूर करने की विनती की है?
भगवान ने किसकी लाज बचाने के लिए चीर बढ़ाया?
“रूप नरहरि” से किस अवतार का संकेत मिलता है?
गजराज किस संकट में फँसा था?
दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या बनने की प्रार्थना करती हैं?
मीरा वृंदावन की कुंज-गलियों में क्या करना चाहती हैं?
चाकरी से मीरा को कौन-सी तीन वस्तुएँ प्राप्त होंगी?
श्रीकृष्ण के गले में कौन-सी माला सुशोभित है?
मीरा प्रभु के दर्शन कहाँ चाहती हैं?
मीरा के पदों में मुख्य रूप से कौन-सा रस है?
परीक्षा के लिए झटपट पुनरावृत्ति
द्रौपदी → प्रह्लाद → गजराज → मीरा की पुकार
चाकरी → बगीचा → दर्शन-स्मरण-भक्ति → कृष्ण का रूप → यमुना तट
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