निपात – हिंदी व्याकरण | परिभाषा, उद्देश्य, भेद, उदाहरण और अभ्यास प्रश्न

हिंदी व्याकरण में निपात ऐसे छोटे-छोटे शब्द हैं जो वाक्य के भाव, बल और प्रभाव में विशेष परिवर्तन उत्पन्न करते हैं। इस लेख में निपात की परिभाषा, निपात का उद्देश्य, निपात के भेद, अव्यय और निपात में अंतर तथा प्रचलित निपात को सरल उदाहरणों के साथ समझाया गया है। साथ ही अभ्यास के लिए 20 बहुविकल्पीय प्रश्न भी दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थी निपात की अवधारणा को अच्छी तरह समझकर परीक्षा की तैयारी कर सकें।

निपात

↑ ऊपर जाएँ

हिंदी भाषा में कुछ ऐसे छोटे-छोटे शब्द प्रयुक्त होते हैं जो देखने में साधारण लगते हैं, परंतु वाक्य के भाव, बल और प्रभाव को बदलने की क्षमता रखते हैं। इन्हीं शब्दों को निपात कहा जाता है। निपात सामान्यतः लिंग, वचन और कारक आदि से प्रभावित नहीं होते। इनका अपना स्वतंत्र अर्थ प्रायः स्पष्ट नहीं होता, किंतु किसी शब्द या वाक्य के साथ जुड़कर वे उसके अर्थ में विशेषता, सीमा, आग्रह, स्वीकृति, निषेध, प्रश्न, आश्चर्य अथवा बल का भाव उत्पन्न कर देते हैं।

जैसे—

मोहन विद्यालय गया।

यह एक सामान्य सूचना है।

मोहन ही विद्यालय गया।

यहाँ ‘ही’ के प्रयोग से स्पष्ट हो रहा है कि विद्यालय जाने वाला केवल मोहन था।

मोहन भी विद्यालय गया।

यहाँ ‘भी’ से यह भाव मिलता है कि मोहन के अतिरिक्त अन्य लोग भी विद्यालय गए थे।

इस प्रकार निपात स्वयं वाक्य का मुख्य अर्थ नहीं बनाते, बल्कि पहले से उपस्थित अर्थ में कोई विशेष भाव जोड़ते हैं। यही उनकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है।

निपात का विश्लेषण

↑ ऊपर जाएँ

निपात अव्यय के समान होते हैं

निपात पर लिंग, वचन और कारक का प्रभाव नहीं पड़ता। उनका रूप नहीं बदलता। इस दृष्टि से उनकी प्रकृति अव्यय शब्दों जैसी होती है।

जैसे—

सीमा ही आएगी।

राम ही आएगा।

बच्चे ही आएँगे।

तीनों वाक्यों में ‘ही’ का रूप समान बना हुआ है।

निपात का स्वतंत्र अर्थ स्पष्ट नहीं होता

‘ही’, ‘भी’, ‘तो’, ‘तक’ जैसे शब्दों को अकेले बोलने पर उनका पूरा अर्थ स्पष्ट नहीं होता। वे किसी दूसरे शब्द या वाक्य के साथ जुड़कर अपना प्रभाव दिखाते हैं।

जैसे—

राहुल ही जीता।

यहाँ ‘ही’ का अर्थ राहुल के साथ जुड़ने पर स्पष्ट होता है और राहुल पर विशेष बल पड़ता है।

निपात वाक्य में नया भाव जोड़ते हैं

निपात का सबसे महत्वपूर्ण कार्य वाक्य के सामान्य अर्थ में नई अर्थ-छटा उत्पन्न करना है।

जैसे—

तुम बाजार जाओगे।

तुम ही बाजार जाओगे।

पहला वाक्य सामान्य कथन है, जबकि दूसरे में ‘ही’ यह स्पष्ट करता है कि बाजार जाने का कार्य विशेष रूप से ‘तुम’ को ही करना है।

निपात का स्थान बदलने से बल भी बदल सकता है

कुछ निपात जिस शब्द के साथ रखे जाते हैं, उसी शब्द या भाव पर विशेष बल डालते हैं।

जैसे—

मैं तो फुटबॉल रोज खेलता हूँ।

यहाँ ‘मैं’ अर्थात् वक्ता पर विशेष बल है।

मैं फुटबॉल तो रोज खेलता हूँ।

यहाँ फुटबॉल खेलने की बात पर बल है।

मैं फुटबॉल रोज तो खेलता हूँ।

यहाँ ‘रोज’ पर बल है।

मैं फुटबॉल रोज खेलता तो हूँ।

यहाँ ‘खेलता हूँ’ अर्थात् क्रिया की पुष्टि पर बल है।

इससे स्पष्ट है कि निपात केवल शब्द नहीं जोड़ते, बल्कि वाक्य के भाव का केंद्र भी बदल सकते हैं।

निपात वाक्य का आवश्यक अंग न होकर भी प्रभावशाली होते हैं

कई बार निपात हटा देने पर वाक्य व्याकरण की दृष्टि से अधूरा नहीं होता, लेकिन उसका विशेष प्रभाव समाप्त हो जाता है।

जैसे—

तुम जाओगे।

तुम ही जाओगे।

दोनों वाक्य पूर्ण हैं, लेकिन दूसरे वाक्य में ‘ही’ के कारण विशिष्टता और बल आ गया है।

परिभाषा

↑ ऊपर जाएँ

व्याकरण के सामान्य नियमों से अलग, लिंग-वचन-कारक आदि से अप्रभावित रहने वाले वे अव्यय-सदृश शब्द, जिनके प्रयोग से वाक्य के भाव और प्रभाव में विशेष वृद्धि होती है, निपात कहलाते हैं।

सरल शब्दों में—

जो शब्द किसी शब्द या वाक्य के साथ जुड़कर उसमें विशेष बल, सीमा या भाव उत्पन्न करते हैं, उन्हें निपात कहते हैं।

जैसे— ही, भी, तो, तक, केवल, सिर्फ, मत, क्या, जी आदि।

निपात का उद्देश्य

↑ ऊपर जाएँ

निपात का मुख्य उद्देश्य वाक्य में केवल नया शब्द जोड़ना नहीं है, बल्कि उसके भाव और प्रभाव को बदलना अथवा अधिक स्पष्ट करना है। इसके माध्यम से वक्ता यह बता सकता है कि वह किस शब्द या विचार पर विशेष जोर देना चाहता है।

निपात के प्रयोग से—

  • किसी बात पर विशेष बल दिया जा सकता है।
  • किसी व्यक्ति या वस्तु को सीमित या विशिष्ट किया जा सकता है।
  • स्वीकृति या अस्वीकृति का भाव प्रकट किया जा सकता है।
  • निषेध व्यक्त किया जा सकता है।
  • प्रश्न, आश्चर्य या इच्छा का भाव प्रकट किया जा सकता है।
  • कथन के किसी विशेष अंश को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

उदाहरण—

तुम्हें सब्जी मंडी जाना होगा।

सामान्य सूचना।

तुम्हें ही सब्जी मंडी जाना होगा।

केवल ‘तुम्हें’ जाने पर बल।

तुम्हें सब्जी मंडी ही जाना होगा।

स्थान ‘सब्जी मंडी’ पर बल।

तुम्हें सब्जी मंडी जाना ही होगा।

जाने की अनिवार्यता पर बल।

निपात का विभाजन

↑ ऊपर जाएँ

आधुनिक हिंदी में निपातों को उनके द्वारा व्यक्त भाव और कार्य के आधार पर कई वर्गों में समझा जा सकता है।

1. स्वीकारबोधक निपात

जो निपात किसी बात की स्वीकृति या सहमति प्रकट करते हैं, उन्हें स्वीकारबोधक निपात कहा जाता है।

प्रमुख निपात: हाँ, जी, जी हाँ, हाँ-हाँ

उदाहरण:

हाँ, मैं कल विद्यालय आऊँगा।

जी हाँ, मैंने कार्य पूरा कर लिया है।

2. नकारबोधक निपात

जो किसी कथन के प्रति अस्वीकृति या नकार का भाव प्रकट करते हैं, वे नकारबोधक निपात कहलाते हैं।

प्रमुख निपात: नहीं, जी नहीं, न, बिल्कुल नहीं

उदाहरण:

नहीं, मैं आज वहाँ नहीं जाऊँगा।

जी नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।

3. निषेधबोधक निपात

इनसे किसी कार्य को करने से रोकने अथवा निषेध करने का भाव प्रकट होता है।

प्रमुख निपात: मत

उदाहरण:

यहाँ शोर मत करो।

सड़क पर तेज मत दौड़ो।

4. प्रश्नबोधक निपात

इन निपातों से वाक्य में प्रश्न का भाव उत्पन्न होता है।

प्रमुख निपात: क्या, न

उदाहरण:

क्या तुमने गृहकार्य पूरा कर लिया?

तुम कल आओगे ?

5. विस्मयादिबोधक निपात

इनसे आश्चर्य, इच्छा या किसी तीव्र मनोभाव की अभिव्यक्ति होती है।

प्रमुख निपात: क्या, काश, काश कि

उदाहरण:

क्या सुंदर दृश्य है!

काश! मैं भी वहाँ जा पाता।

6. बलबोधक या सीमाबोधक निपात

इनका प्रयोग वाक्य के किसी विशेष शब्द या भाव पर बल देने अथवा उसे सीमित करने के लिए किया जाता है।

प्रमुख निपात: तो, ही, भी, तक, पर, सिर्फ, केवल

उदाहरण:

रवि ही यह काम कर सकता है।

सीमा भी हमारे साथ जाएगी।

वह गाँव तक पैदल गया।

केवल विद्यार्थी अंदर जाएँ।

7. तुलनाबोधक निपात

इनसे समानता या तुलना का भाव प्रकट होता है।

प्रमुख निपात: सा

उदाहरण:

उसका चेहरा चाँद सा सुंदर है।

8. अवधारणाबोधक निपात

ये किसी मात्रा, समय अथवा स्थिति का अनुमान या निकटता प्रकट करते हैं।

प्रमुख निपात: ठीक, लगभग, करीब, तकरीबन

उदाहरण:

वह लगभग दस बजे पहुँचा।

विद्यालय यहाँ से करीब दो किलोमीटर दूर है।

9. आदरबोधक निपात

जो किसी व्यक्ति के प्रति आदर या सम्मान का भाव व्यक्त करें, वे आदरबोधक निपात कहलाते हैं।

प्रमुख निपात: जी

उदाहरण:

पिताजी जी अभी घर पर हैं।

हाँ जी, मैं समझ गया।

पारंपरिक दृष्टि से निपात

पुस्तक में संस्कृत व्याकरण की परंपरा के आधार पर निपातों के तीन रूपों का भी उल्लेख किया गया है—

उभयार्थक निपात — जैसे: ख, न, नु आदि।

कर्मोपसंग्राहक निपात — जैसे: न, आ, वा आदि।

पदपूरणार्थक निपात — जैसे: नूनम्, खलु, हि, अथ आदि।

आधुनिक हिंदी के अध्ययन में विद्यार्थियों के लिए निपात को उसके वाक्यगत कार्य और भाव के आधार पर समझना अधिक उपयोगी होता है।

अव्यय और निपात में अंतर

↑ ऊपर जाएँ

निपात और अव्यय में बहुत समानता होने के कारण दोनों को समझने में भ्रम हो सकता है। दोनों ही सामान्यतः लिंग, वचन और कारक आदि के कारण अपना रूप नहीं बदलते, लेकिन उनके प्रयोग में अंतर होता है।

अव्यय वाक्य में अपना निश्चित व्याकरणिक कार्य करते हैं, जबकि निपात का प्रमुख कार्य किसी शब्द या पूरे कथन के भाव, बल अथवा प्रभाव को बढ़ाना होता है।

अव्यय के रूप में प्रयोग निपात के रूप में प्रयोग

मैं विद्यालय नहीं जाऊँगा।

यहाँ ‘नहीं’ सीधे ‘जाऊँगा’ क्रिया का निषेध कर रहा है। इस प्रयोग में इसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण के रूप में देखा जा सकता है।

नहीं, मैं विद्यालय नहीं जाऊँगा।

वाक्य की शुरुआत में आया पहला ‘नहीं’ वक्ता की स्पष्ट अस्वीकृति को प्रकट कर रहा है। यह केवल क्रिया का निषेध नहीं कर रहा, बल्कि पूरे कथन को अतिरिक्त भाव दे रहा है। ऐसे प्रयोग में उसका निपात-स्वरूप अधिक स्पष्ट हो जाता है।

मैं विद्यालय अवश्य जाऊँगा।

यहाँ ‘अवश्य’ क्रिया की निश्चितता बता रहा है।

हाँ-हाँ, मैं विद्यालय अवश्य जाऊँगा।

यहाँ ‘हाँ-हाँ’ पूरे कथन में स्वीकृति और अतिरिक्त भाव जोड़ रहा है।

बहुप्रयुक्त एवं प्रचलित निपात

↑ ऊपर जाएँ

हिंदी में ही, भी, तो, तक, भर, सिर्फ और केवल जैसे निपातों का प्रयोग बहुत अधिक होता है। इनका कोई एक निश्चित स्वतंत्र अर्थ नहीं होता। जिस शब्द, पद या वाक्यांश के साथ ये जुड़ते हैं, उसके अर्थ को विशेष रूप से उभार देते हैं।

‘ही’ का प्रयोग

‘ही’ किसी एक शब्द या भाव को विशेष रूप से सीमित या प्रमुख करता है।

तुम ही यह काम करोगे।

अर्थ— दूसरा नहीं, केवल तुम।

तुम यह काम ही करोगे।

अर्थ— कार्य करने की बात पर विशेष बल।

‘भी’ का प्रयोग

‘भी’ से किसी व्यक्ति या वस्तु को पहले से बताए गए समूह अथवा स्थिति में शामिल करने का भाव आता है।

रिया भी प्रतियोगिता में जाएगी।

अर्थ— रिया के अलावा अन्य लोग भी जा रहे हैं।

‘तो’ का प्रयोग

‘तो’ संदर्भ, तुलना, पुष्टि या विशेष बल देने के लिए प्रयुक्त होता है।

मैं तो रोज पढ़ता हूँ।

यहाँ वक्ता अपने संबंध में विशेष जोर दे रहा है।

कभी-कभी ‘तो’ पहले कही गई बात या परिस्थिति से संबंध भी स्थापित करता है—

तो, आप आज नहीं जाएँगे।

यहाँ ‘तो’ पूर्व कथन या परिस्थिति को आगे की बात से जोड़ रहा है।

‘केवल’ और ‘सिर्फ’

‘केवल’ और ‘सिर्फ’ किसी व्यक्ति, वस्तु या कार्य को सीमित करते हैं।

केवल तुम वहाँ जाओगे।

यहाँ ‘केवल’ ‘तुम’ की कोई विशेषता नहीं बता रहा, बल्कि यह बता रहा है कि दूसरे नहीं, सिर्फ तुम जाओगे। इसलिए इस प्रयोग में यह निपात का कार्य कर रहा है।

‘तक’ का प्रयोग

यह किसी सीमा को व्यक्त कर सकता है।

वह शाम तक लौट आएगा।

यहाँ ‘तक’ समय की सीमा स्पष्ट कर रहा है।

अव्यय और निपात में संभ्रम

↑ ऊपर जाएँ

अव्यय और निपात के बीच पूरी तरह स्पष्ट सीमा खींचना हमेशा आसान नहीं है। अनेक ऐसे शब्द हैं जिन्हें कुछ व्याकरणकार क्रियाविशेषण या विस्मयादिबोधक अव्यय के अंतर्गत रखते हैं, जबकि दूसरे संदर्भों में वही शब्द निपात की तरह वाक्य के भाव को प्रभावित करते दिखाई देते हैं।

इसी कारण किसी शब्द को केवल उसके रूप से न देखकर वाक्य में उसके कार्य के आधार पर पहचानना अधिक उचित है। विशेष रूप से वे शब्द जो किसी पद पर बल, सीमा या अवधारणा स्थापित करते हैं, निपात के रूप में अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं।

अगले भाग में: अव्यय और निपात में संभ्रम को उदाहरणों सहित विस्तार से समझेंगे और जानेंगे कि ‘ही’, ‘सिर्फ’, ‘केवल’, ‘नहीं’, ‘हाँ’ आदि अलग-अलग वाक्यों में कब निपात और कब अव्यय के रूप में कार्य करते हैं।

अव्यय और निपात के बीच होने वाले इस संभ्रम को विस्तार से समझने के लिए अव्यय और निपात में संभ्रम – उदाहरण सहित पढ़ें।

अभ्यास प्रश्न

↑ ऊपर जाएँ

नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए। उत्तर देखने के लिए प्रत्येक प्रश्न के विकल्पों के बाद दाईं ओर दिए गए उत्तर जाँचें पर क्लिक करें।

1. निपात का प्रमुख कार्य क्या है?

  1. शब्द का लिंग बदलना
  2. वाक्य के भाव और प्रभाव में विशेष वृद्धि करना
  3. संज्ञा का निर्माण करना
  4. क्रिया का काल बदलना
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (B) वाक्य के भाव और प्रभाव में विशेष वृद्धि करना

2. निपात सामान्यतः किनसे प्रभावित नहीं होते?

  1. केवल काल से
  2. केवल पुरुष से
  3. केवल वचन से
  4. लिंग, वचन और कारक से
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (D) लिंग, वचन और कारक से

3. ‘सीमा ही आएगी।’ वाक्य में निपात कौन-सा है?

  1. ही
  2. सीमा
  3. आएगी
  4. कोई नहीं
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (A) ही

4. ‘मत’ किस प्रकार का निपात है?

  1. आदरबोधक
  2. तुलनाबोधक
  3. निषेधबोधक
  4. स्वीकृतिबोधक
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (C) निषेधबोधक

5. इनमें से स्वीकारबोधक निपात कौन-सा है?

  1. मत
  2. जी हाँ
  3. काश
  4. लगभग
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (B) जी हाँ

6. नकारबोधक निपात का उदाहरण कौन-सा है?

  1. नहीं
  2. काश
  3. लगभग
  4. सा
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (A) नहीं

7. ‘काश!’ किस प्रकार का निपात है?

  1. प्रश्नबोधक
  2. आदरबोधक
  3. नकारबोधक
  4. विस्मयादिबोधक
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (D) विस्मयादिबोधक

8. ‘सा’ किस प्रकार का निपात है?

  1. प्रश्नबोधक
  2. स्वीकृतिबोधक
  3. तुलनाबोधक
  4. निषेधबोधक
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (C) तुलनाबोधक

9. ‘लगभग’ किस प्रकार का निपात है?

  1. आदरबोधक
  2. नकारबोधक
  3. अवधारणाबोधक
  4. प्रश्नबोधक
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (C) अवधारणाबोधक

10. आदरबोधक निपात का प्रमुख उदाहरण क्या है?

  1. जी
  2. मत
  3. काश
  4. तक
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (A) जी

11. ‘तुम्हें ही सब्जी मंडी जाना होगा।’ में विशेष बल किस पर है?

  1. सब्जी पर
  2. ‘तुम्हें’ पर
  3. मंडी पर
  4. समय पर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (B) ‘तुम्हें’ पर

12. ‘तुम्हें सब्जी मंडी जाना ही होगा।’ में किस बात पर बल है?

  1. सब्जी खरीदने पर
  2. व्यक्ति पर
  3. स्थान पर
  4. जाने की अनिवार्यता पर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (D) जाने की अनिवार्यता पर

13. ‘मैं तो फुटबॉल रोज खेलता हूँ।’ में विशेष बल किस पर है?

  1. वक्ता पर
  2. फुटबॉल पर
  3. रोज पर
  4. क्रिया पर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (A) वक्ता पर

14. ‘मैं फुटबॉल रोज तो खेलता हूँ।’ में ‘तो’ किस पर बल देता है?

  1. मैं पर
  2. फुटबॉल पर
  3. रोज पर
  4. विद्यालय पर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (C) रोज पर

15. ‘केवल तुम वहाँ जाओगे।’ में ‘केवल’ क्या कर रहा है?

  1. ‘तुम’ की विशेषता बता रहा है
  2. काल बता रहा है
  3. स्थान बता रहा है
  4. अर्थ को ‘तुम’ तक सीमित कर रहा है
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (D) अर्थ को ‘तुम’ तक सीमित कर रहा है

16. ‘रिया भी प्रतियोगिता में जाएगी।’ में ‘भी’ से कौन-सा भाव प्रकट होता है?

  1. निषेध
  2. रिया को अन्य लोगों के साथ शामिल करने का भाव
  3. प्रश्न
  4. आश्चर्य
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (B) रिया को अन्य लोगों के साथ शामिल करने का भाव

17. ‘वह शाम तक लौट आएगा।’ में ‘तक’ क्या स्पष्ट कर रहा है?

  1. व्यक्ति
  2. समय की सीमा
  3. आदर
  4. अस्वीकृति
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (B) समय की सीमा

18. अव्यय और निपात की पहचान में किस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए?

  1. शब्द की लंबाई पर
  2. शब्द के पहले अक्षर पर
  3. वाक्य में शब्दों की संख्या पर
  4. वाक्य में उस शब्द के कार्य पर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (D) वाक्य में उस शब्द के कार्य पर

19. ‘नहीं, मैं विद्यालय नहीं जाऊँगा।’ में आरंभ का ‘नहीं’ क्या प्रकट करता है?

  1. समय
  2. तुलना
  3. वक्ता की स्पष्ट अस्वीकृति और अतिरिक्त भाव
  4. आदर
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (C) वक्ता की स्पष्ट अस्वीकृति और अतिरिक्त भाव

20. संस्कृत व्याकरण की परंपरा के आधार पर निपातों के कितने रूपों का उल्लेख किया गया है?

  1. तीन
  2. दो
  3. चार
  4. नौ
उत्तर जाँचें
सही उत्तर: (A) तीन

FAQ's – निपात हिंदी व्याकरण

↑ ऊपर जाएँ
निपात किसे कहते हैं?

जो शब्द किसी शब्द या वाक्य के साथ जुड़कर उसमें विशेष बल, सीमा या भाव उत्पन्न करते हैं, उन्हें निपात कहते हैं।

निपात के प्रमुख उदाहरण कौन-कौन से हैं?

ही, भी, तो, तक, केवल, सिर्फ, मत, क्या, जी आदि निपात के प्रमुख उदाहरण हैं।

निपात का मुख्य उद्देश्य क्या है?

निपात का मुख्य उद्देश्य वाक्य के भाव और प्रभाव को बदलना अथवा अधिक स्पष्ट करना तथा किसी विशेष शब्द या विचार पर बल देना है।

‘ही’ और ‘भी’ में क्या अंतर है?

‘ही’ सामान्यतः किसी व्यक्ति, वस्तु या भाव को विशेष रूप से सीमित या प्रमुख करता है, जबकि ‘भी’ किसी व्यक्ति या वस्तु को पहले से उपस्थित समूह अथवा स्थिति में शामिल करने का भाव प्रकट करता है।

अव्यय और निपात में अंतर कैसे पहचानें?

किसी शब्द को केवल उसके रूप से न देखकर वाक्य में उसके कार्य के आधार पर पहचानना चाहिए। यदि वह किसी शब्द या पूरे कथन में विशेष बल, सीमा या अतिरिक्त भाव उत्पन्न करता है तो उसका निपात-स्वरूप अधिक स्पष्ट होता है।