1. पाठ का परिचय
पाठ का नाम: क्या लिखूँ?
लेखक: पदुमलाल
पुन्नालाल बख्शी
विधा: निबंध
मुख्य विषय: निबंध लेखन की
प्रक्रिया, लेखन की कठिनाई, अनुभव-आधारित लेखन, समाज-सुधार और “दूर के ढोल सुहावने” लोकोक्ति का अर्थ।
इस निबंध में लेखक ने निबंध लिखने की प्रक्रिया को बहुत रोचक और आत्मीय शैली
में समझाया है। लेखक को दो विषयों— “दूर के ढोल
सुहावने” और “समाज-सुधार”—पर निबंध लिखना है। इन्हीं दो विषयों के बहाने लेखक निबंध-लेखन की कठिनाइयों, आदर्श निबंध की विशेषताओं, शैली, रूपरेखा, अनुभव और विचारों की भूमिका पर चर्चा करते हैं। NCERT परिचय में भी इस पाठ को निबंध-रचना की प्रक्रिया
से जुड़ा बताया गया है।
2. लेखक परिचय
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक, कवि और
हास्य-व्यंग्यकार थे। उनका जन्म सन 1894
में खैरागढ़, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। निबंध लेखन में उनका विशेष योगदान
माना जाता है। उनकी रचनाओं में समाज,
लोकजीवन, भारतीय कृषि, अध्यात्म और सामाजिक संबंधों का विचारपूर्ण विश्लेषण मिलता
है। उनका निधन सन 1971 में हुआ।
3. पाठ का पूरा
सारांश
“क्या लिखूँ?” एक आत्मपरक और व्यंग्यात्मक निबंध है। लेखक को
आज निबंध लिखना ही है, लेकिन उनके
सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे क्या और कैसे लिखें। लेखक सबसे पहले अंग्रेज़ी
निबंधकार ए.जी. गार्डिनर के विचार का उल्लेख करते हैं। गार्डिनर का मानना है कि
लेखन एक विशेष मानसिक स्थिति में होता है। जब मन में भावों का आवेग उठता है, तब कोई भी विषय केवल बहाना बन जाता है। असली महत्त्व विषय
का नहीं, बल्कि लेखक के मनोभावों का
होता है।
लेखक इस विचार से सहमत तो हैं, लेकिन अपनी
कठिनाई भी बताते हैं। उनके भीतर भाव अपने-आप नहीं उठते; उन्हें सोचना पड़ता है, चिंतन करना पड़ता है और परिश्रम करना पड़ता है। इस बार उन्हें और अधिक मेहनत
करनी है क्योंकि नमिता ने उनसे “दूर के ढोल सुहावने” पर और अमिता ने “समाज-सुधार”
पर आदर्श निबंध माँगा है।
लेखक सोचते हैं कि आदर्श निबंध लिखने से पहले निबंध-शास्त्र के आचार्यों की
राय जानना चाहिए। कुछ विद्वानों के अनुसार निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि बहुत लंबे निबंध में रचना की सुंदरता कम हो सकती
है। फिर लेखक समझते हैं कि निबंध के दो मुख्य अंग हैं— सामग्री और शैली। सामग्री
के लिए अध्ययन, मनन और शोध
चाहिए, लेकिन लेखक के पास समय कम
है। उन्हें दो घंटे में दो निबंध लिखने हैं और उनके पास कोई विश्वकोश या संदर्भ
ग्रंथ भी नहीं है।
इसके बाद लेखक रूपरेखा बनाने की बात करते हैं। वे स्वीकार करते हैं कि निबंध
लिखने के बाद उसका सार निकालना आसान हो सकता है, पर लिखने से पहले रूपरेखा बनाना उनके लिए कठिन है। वे गार्डिनर और शेक्सपीयर
का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि बड़े लेखकों को भी शीर्षक और नामकरण में कठिनाई
होती रही है।
फिर लेखक शैली पर विचार करते हैं। विद्वान कहते हैं कि भाषा में प्रवाह होना
चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए। लेखक व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि वे मास्टर
हैं, इसलिए अपनी विद्वता दिखाने
के लिए बड़े और जटिल वाक्य लिखना भी ज़रूरी समझते हैं। वे बाणभट्ट, श्रीहर्ष और सेनापति जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करके कठिन
भाषा और अलंकारों की परंपरा की ओर संकेत करते हैं।
इसके बाद लेखक फ्रांसीसी निबंधकार मोंतेन की पद्धति का उल्लेख करते हैं।
मोंतेन की पद्धति में लेखक अपने देखे,
सुने और अनुभव किए हुए जीवन को सहज रूप में लिखता है। इसमें लेखक की सच्ची
अनुभूति और निजी भाव प्रमुख होते हैं। लेखक को यह तरीका अच्छा लगता है क्योंकि
इससे वे अपने अनुभवों के आधार पर लिख सकते हैं।
फिर लेखक को अमीर खुसरो की कहानी याद आती है। कहानी में चार स्त्रियाँ अलग-अलग
विषयों— खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल—पर कविता सुनना चाहती हैं। खुसरो एक ही रचना
में चारों विषयों को मिला देते हैं। लेखक इसी तरकीब को अपनाते हैं और तय करते हैं
कि वे दोनों विषयों— “दूर के ढोल सुहावने” और “समाज-सुधार”—को एक ही निबंध में
जोड़ देंगे।
अब लेखक “दूर के ढोल सुहावने” की व्याख्या करते हैं। ढोल पास से बहुत तेज़ और
कर्कश लग सकता है, लेकिन दूर से
वही आवाज़ मधुर और मनोहर लगती है। दूर बैठे व्यक्ति को ढोल की आवाज़ में विवाह, उत्सव, आनंद और प्रेम
का संगीत सुनाई देता है। इसलिए दूर की वस्तु या स्थिति अक्सर अच्छी लगती है, क्योंकि दूरी से उसकी वास्तविक कठिनाइयाँ दिखाई नहीं देतीं।
इसी आधार पर लेखक तरुणों और वृद्धों की मानसिकता की तुलना करते हैं। युवा लोग
भविष्य को सुंदर मानते हैं क्योंकि वे जीवन-संघर्ष से अभी दूर होते हैं। वृद्ध लोग
अतीत को सुखद मानते हैं क्योंकि वे अपनी युवावस्था और बचपन को याद करते हैं। युवा
भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं,
जबकि वृद्ध अतीत को वर्तमान में देखना चाहते हैं। इसलिए वर्तमान हमेशा असंतोष
और सुधार की मांग से भरा रहता है।
अंत में लेखक समाज-सुधार की बात करते हैं। वे कहते हैं कि मनुष्य के इतिहास
में ऐसा कोई समय नहीं रहा जब सुधार की आवश्यकता न रही हो। जीवन में नए दोष पैदा
होते हैं और नए सुधार भी होते हैं। जो कभी सुधार था, वह आगे चलकर दोष भी बन सकता है और फिर उसके लिए नया सुधार चाहिए। इसी कारण
जीवन को प्रगतिशील माना गया है।
5. पाठ का
केंद्रीय भाव
इस निबंध का केंद्रीय भाव यह है कि लेखन केवल विषय पर जानकारी लिख देना नहीं है, बल्कि लेखक के अनुभव, भाव, चिंतन,
शैली और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति है। लेखक निबंध-लेखन की कठिनाइयों को हास्य, व्यंग्य और आत्मीयता के साथ समझाते हैं। साथ ही वे यह भी
बताते हैं कि दूर से कोई वस्तु या स्थिति अच्छी लग सकती है, लेकिन निकट जाकर उसका यथार्थ समझ आता है।
6. शीर्षक “क्या
लिखूँ?” की सार्थकता
यह शीर्षक अत्यंत सार्थक है क्योंकि पूरे निबंध में लेखक इसी दुविधा से जूझते
हैं कि वे क्या लिखें और कैसे लिखें। उन्हें दो विषयों पर आदर्श निबंध लिखना है, लेकिन वे लेखन की प्रक्रिया, विषय, सामग्री, रूपरेखा और शैली की समस्या में उलझ जाते हैं। इसलिए “क्या
लिखूँ?” शीर्षक लेखक की मानसिक
स्थिति और पूरे निबंध की मूल समस्या को प्रकट करता है।
7. पाठ की प्रमुख
विशेषताएँ
|
विशेषता |
विवरण |
|
आत्मपरक शैली |
लेखक स्वयं पाठक से संवाद करता हुआ प्रतीत होता है। |
|
हास्य-व्यंग्य |
लेखक अपनी कठिनाई को रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है। |
|
विचारात्मकता |
पाठ में लेखन,
समाज-सुधार, पीढ़ीगत
दृष्टि और जीवन की प्रगति पर विचार है। |
|
उदाहरणों का प्रयोग |
गार्डिनर, मोंतेन, शेक्सपीयर, अमीर खुसरो आदि के संदर्भ दिए गए हैं। |
|
लोकोक्ति का विस्तार |
“दूर के ढोल
सुहावने” को गहराई से समझाया गया है। |
|
निबंध-लेखन की प्रक्रिया |
सामग्री, शैली, रूपरेखा, अनुभव और भावों की भूमिका बताई गई है। |
8. महत्वपूर्ण
प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लेखक को निबंध लिखने में कठिनाई क्यों हो रही थी?
उत्तर:
लेखक को निबंध लिखने में कठिनाई इसलिए हो रही थी क्योंकि उन्हें दो अलग-अलग
विषयों पर आदर्श निबंध लिखने थे। नमिता “दूर के ढोल सुहावने” पर निबंध चाहती थी और
अमिता “समाज-सुधार” पर। लेखक को विषय,
सामग्री, रूपरेखा और शैली सभी पर
विचार करना पड़ रहा था।
प्रश्न 2.
ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लेखन कब होता है?
उत्तर:
गार्डिनर के अनुसार लेखन तब होता है जब मन में विशेष भाव-स्थिति पैदा होती है।
उस समय लेखक के भीतर उमंग, स्फूर्ति और
आवेग उठता है। तब कोई भी विषय केवल भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाता है।
प्रश्न 3.
लेखक गार्डिनर के विचार से पूरी तरह अपने को क्यों नहीं जोड़ पाते?
उत्तर:
लेखक मानते हैं कि गार्डिनर का विचार सही है, लेकिन वे स्वयं ऐसी सहज मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं करते। उन्हें लिखने के
लिए सोच-विचार, चिंतन और
परिश्रम करना पड़ता है।
प्रश्न 4.
निबंध के दो मुख्य अंग कौन-से बताए गए हैं?
उत्तर:
निबंध के दो मुख्य अंग हैं— सामग्री और शैली। सामग्री में
विषय से जुड़े विचार, तथ्य और अनुभव
आते हैं, जबकि शैली अभिव्यक्ति का
ढंग है।
प्रश्न 5.
मोंतेन की निबंध-पद्धति की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर:
मोंतेन की पद्धति में लेखक अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए जीवन को स्वतंत्र और सहज रूप में लिखता है। इसमें लेखक
की सच्ची अनुभूति और निजी भाव प्रमुख होते हैं।
प्रश्न 6.
अमीर खुसरो की कहानी का पाठ में क्या महत्व है?
उत्तर:
अमीर खुसरो की कहानी से लेखक को एक उपाय मिलता है। जिस प्रकार खुसरो ने चार
विषयों को एक ही पद्य में मिला दिया था, उसी तरह लेखक भी दो विषयों— “दूर के ढोल सुहावने” और “समाज-सुधार”—को एक ही
निबंध में जोड़ने का विचार करते हैं।
प्रश्न 7.
“दूर के ढोल सुहावने” लोकोक्ति का अर्थ क्या है?
उत्तर:
इस लोकोक्ति का अर्थ है कि दूर से कोई वस्तु, व्यक्ति या स्थिति आकर्षक लग सकती है, लेकिन उसके पास जाने पर उसकी वास्तविक कठिनाइयाँ समझ में आती हैं।
प्रश्न 8.
लेखक के अनुसार युवा और वृद्ध दोनों वर्तमान से असंतुष्ट क्यों रहते हैं?
उत्तर:
युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं और उसे वर्तमान में लाना चाहते हैं। वृद्ध
अतीत को सुखद मानते हैं और उसे वर्तमान में फिर से देखना चाहते हैं। इसी कारण
दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।
प्रश्न 9.
समाज-सुधार के विषय में लेखक का क्या विचार है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार समाज-सुधार की आवश्यकता हर युग में रही है। जीवन में नए दोष
पैदा होते हैं और उनके लिए नए सुधार आवश्यक हो जाते हैं। इसलिए सुधार की प्रक्रिया
कभी समाप्त नहीं होती।
प्रश्न 10.
पाठ से हमें लेखन के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर:
पाठ से सीख मिलती है कि अच्छा लेखन केवल जानकारी का संग्रह नहीं है। उसमें
अनुभव, विचार, भावना, शैली, रूपरेखा और लेखक की निजी दृष्टि का संतुलन होना चाहिए।
9. NCERT “मेरे उत्तर
मेरे तर्क” — उत्तर संकेत
NCERT अभ्यास में दिए
गए MCQ भाग में निबंध के भाव, मोंतेन की पद्धति, युवा-वृद्ध तुलना, अमीर खुसरो की
कथा और समाज-सुधार से जुड़े प्रश्न दिए गए हैं।
|
प्रश्न |
सही उत्तर |
कारण |
|
1 |
क |
“हैट” लेखक के भावों और “खूँटी” विषय का प्रतीक है; भाव विषय से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। |
|
2 |
घ |
मोंतेन की पद्धति अनुभव-आधारित स्वच्छंद लेखन को महत्त्व
देती है। |
|
3 |
घ |
तरुणों का आधार अभिलाषा है और वृद्धों का आधार अनुभव। |
|
4 |
ख |
अमीर खुसरो की कथा कई विषयों को एक साथ जोड़ने की प्रतिभा
दिखाती है। |
|
5 |
क |
लेखक के अनुसार सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती
है। |
10. दीर्घ उत्तरीय
प्रश्न
प्रश्न 1.
“क्या लिखूँ?” निबंध में
निबंध-लेखन की प्रक्रिया कैसे स्पष्ट की गई है?
उत्तर:
“क्या लिखूँ?” निबंध में लेखक
ने निबंध-लेखन की प्रक्रिया को बहुत स्वाभाविक और रोचक ढंग से स्पष्ट किया है।
लेखक सबसे पहले लेखन की मानसिक स्थिति पर विचार करते हैं। वे गार्डिनर के विचार से
बताते हैं कि लेखन के लिए मन में भावों का आवेग आवश्यक है। इसके बाद वे निबंध के
दो मुख्य अंगों— सामग्री और शैली—की चर्चा करते हैं। सामग्री के लिए अध्ययन, मनन और विचार-संग्रह जरूरी है। शैली के लिए भाषा में प्रवाह
और वाक्यों में स्पष्टता आवश्यक है। लेखक रूपरेखा के महत्व को भी स्वीकार करते हैं, पर बताते हैं कि व्यवहार में यह काम कठिन हो सकता है। अंत
में वे अनुभव-आधारित लेखन को महत्त्व देते हैं। इस प्रकार पाठ में निबंध लिखने की
पूरी प्रक्रिया— प्रेरणा, विषय-चयन, सामग्री-संग्रह,
रूपरेखा, शैली और भाव-विस्तार—समझाई
गई है।
प्रश्न 2.
“दूर के ढोल सुहावने” लोकोक्ति को लेखक ने किस प्रकार समझाया है?
उत्तर:
लेखक ने “दूर के ढोल सुहावने” लोकोक्ति को बहुत सुंदर उदाहरण से समझाया है।
ढोल पास से सुनने पर कर्कश और तेज़ लगता है, लेकिन दूर से वही ध्वनि मधुर प्रतीत होती है। दूर बैठा व्यक्ति उस ध्वनि में
विवाह, आनंद, उत्सव और प्रेम की कल्पना कर लेता है। उसे ढोल की वास्तविक
कर्कशता का अनुभव नहीं होता। इसी प्रकार जीवन में भी दूर की वस्तु, स्थिति या समय हमें अधिक सुंदर लगता है। युवा भविष्य को
सुंदर मानते हैं क्योंकि वे उसके संघर्ष से दूर होते हैं। वृद्ध अतीत को सुंदर
मानते हैं क्योंकि वे उसकी कठिनाइयों को भूल चुके होते हैं। इस प्रकार लेखक
लोकोक्ति को जीवन-दर्शन से जोड़ देते हैं।
प्रश्न 3.
लेखक ने युवा और वृद्ध की मानसिकता की तुलना कैसे की है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार युवा और वृद्ध दोनों वर्तमान से संतुष्ट नहीं रहते, पर उनके कारण अलग-अलग हैं। युवा भविष्य को उज्ज्वल मानते
हैं और परिवर्तन या क्रांति के समर्थक होते हैं। वे भविष्य को वर्तमान में लाना
चाहते हैं। दूसरी ओर वृद्ध अतीत को गौरवपूर्ण और सुखद मानते हैं। वे पुराने समय की
स्मृतियों में आनंद खोजते हैं और अतीत को वर्तमान में फिर से देखना चाहते हैं। इस
कारण वर्तमान दोनों के बीच संघर्ष का क्षेत्र बन जाता है। लेखक इस तुलना के माध्यम
से पीढ़ीगत अंतर को स्पष्ट करते हैं।
प्रश्न 4.
समाज-सुधार के विषय में लेखक का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लेखक समाज-सुधार को जीवन की निरंतर प्रक्रिया मानते हैं। उनके अनुसार मानव
इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं रहा जब सुधार की आवश्यकता न पड़ी हो। समाज में
समय-समय पर नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और उन्हें दूर करने के लिए नए सुधार किए
जाते हैं। कभी-कभी जो सुधार किसी समय उपयोगी था, वही आगे चलकर दोष बन सकता है। इसलिए सुधार का क्रम कभी समाप्त नहीं होता। यही
जीवन को प्रगतिशील बनाता है।
11.
Competency-Based Questions with Answers
प्रश्न 1.
लेखक कहता है कि विषय से अधिक मन के भाव महत्त्वपूर्ण हैं। क्या आप इस विचार
से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
हाँ, मैं इस विचार से सहमत हूँ।
केवल विषय चुन लेने से अच्छा लेखन नहीं हो जाता। यदि लेखक के भीतर अनुभव, संवेदना और विचार नहीं हैं, तो लेखन प्रभावशाली नहीं होगा। वही विषय किसी भावपूर्ण लेखक के हाथ में जीवंत
हो सकता है। इसलिए लेखन में विषय माध्यम है, पर लेखक की दृष्टि और भाव असली शक्ति हैं।
प्रश्न 2.
लेखक को यदि इंटरनेट और पुस्तकालय उपलब्ध होता, तो क्या उनका निबंध अलग होता? अपने विचार
लिखिए।
उत्तर:
हाँ, संभव है कि उनका निबंध अधिक
तथ्यपूर्ण और व्यवस्थित होता। इंटरनेट और पुस्तकालय से उन्हें “दूर के ढोल
सुहावने” और “समाज-सुधार” पर अधिक सामग्री मिल जाती। परंतु केवल सामग्री से निबंध
उत्कृष्ट नहीं होता। लेखक की मौलिक दृष्टि, अनुभव और शैली फिर भी आवश्यक रहती।
प्रश्न 3.
“दूर से देखी गई वस्तु और
निकट से अनुभव की गई वस्तु में अंतर होता है।” पाठ के आधार पर समझाइए।
उत्तर:
पाठ में ढोल का उदाहरण दिया गया है। ढोल पास से कर्कश लगता है, पर दूर से उसकी ध्वनि मधुर प्रतीत होती है। इसी तरह किसी
वस्तु, व्यक्ति या स्थिति को दूर
से देखकर हम उसके बारे में अच्छा अनुमान लगा लेते हैं, लेकिन निकट से उसकी वास्तविकता सामने आती है। इसलिए अनुभव
अनुमान से अधिक विश्वसनीय होता है।
प्रश्न 4.
लेखक ने समाज-सुधार को स्थायी आवश्यकता क्यों माना है?
उत्तर:
लेखक ने समाज-सुधार को स्थायी आवश्यकता इसलिए माना है क्योंकि समाज लगातार
बदलता रहता है। परिवर्तन के साथ नई समस्याएँ और नए दोष उत्पन्न होते हैं। इसलिए हर
युग में नए सुधारों की जरूरत पड़ती है। यही समाज को आगे बढ़ाता है।
प्रश्न 5.
मोंतेन की पद्धति आज के छात्रों के लेखन में कैसे उपयोगी हो सकती है?
उत्तर:
मोंतेन की पद्धति छात्रों को अनुभव-आधारित लेखन सिखाती है। छात्र केवल रटकर
लिखने के बजाय अपने देखे, सुने और महसूस
किए अनुभवों को लिख सकते हैं। इससे लेखन मौलिक, जीवंत और प्रभावशाली बनता है।
|
मूल्य |
पाठ से संबंध |
|
मौलिकता |
लेखक अनुभव-आधारित लेखन को महत्त्व देता है। |
|
आत्मचिंतन |
लेखक स्वयं से प्रश्न करता है कि क्या और कैसे लिखा जाए। |
|
व्यावहारिकता |
निबंध लेखन में सामग्री, रूपरेखा और शैली की जरूरत बताई गई है। |
|
सामाजिक चेतना |
समाज-सुधार की आवश्यकता पर विचार किया गया है। |
|
परिवर्तनशीलता |
जीवन को प्रगतिशील माना गया है। |
|
अनुभव का महत्व |
दूर की कल्पना और निकट के अनुभव का अंतर समझाया गया है। |
13. व्याकरण की
बात: समास
NCERT अभ्यास में इस
पाठ के साथ समास, उपसर्ग-प्रत्यय, भाव-विस्तार, लोकोक्ति और अनुभव-आधारित लेखन की गतिविधियाँ दी गई हैं। समास को दो या अधिक
शब्दों के मेल से बने नए शब्द की रचना के रूप में समझाया गया है; साथ ही समास-विग्रह, पूर्वपद-उत्तरपद और समास के प्रमुख भेद भी दिए गए हैं।
समास की परिभाषा
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने संक्षिप्त और नए अर्थ वाले शब्द को समास कहते हैं।
उदाहरण
|
सामासिक शब्द |
समास-विग्रह |
समास का प्रकार |
|
निबंध-रचना |
निबंध की रचना |
तत्पुरुष |
|
निबंधशास्त्र |
निबंध का शास्त्र |
तत्पुरुष |
|
समाज-सुधार |
समाज का सुधार |
तत्पुरुष |
|
जीवन-संग्राम |
जीवन का संग्राम |
तत्पुरुष |
|
अतीत-गौरव |
अतीत का गौरव |
तत्पुरुष |
|
नव-वधू |
नई वधू |
कर्मधारय |
|
लज्जाशील |
लज्जा से युक्त |
बहुव्रीहि/गुणसूचक
संदर्भ |
|
भाई-बहन |
भाई और बहन |
द्वंद्व |
|
यथाशक्ति |
शक्ति के अनुसार |
अव्ययीभाव |
14. उपसर्ग और
प्रत्यय
उपसर्ग
जो शब्दांश मूल शब्द के पहले लगकर नया शब्द बनाते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।
|
शब्द |
मूल शब्द |
उपसर्ग |
अर्थ |
|
दुर्बोध |
बोध |
दुर् |
कठिन समझ में आने
वाला |
|
अनादि |
आदि |
अन् |
जिसका आदि न हो |
|
असंतोष |
संतोष |
अ |
संतोष का अभाव |
|
अस्पष्टता |
स्पष्ट |
अ |
स्पष्ट न होना |
|
अनुसरण |
सरण/चलना |
अनु |
पीछे चलना/पालन
करना |
15. भाव-विस्तार
वाक्य 1
“जो तरुण संसार
के जीवन-संग्राम से दूर हैं,
उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
भाव-विस्तार
युवा अवस्था में व्यक्ति जीवन की वास्तविक कठिनाइयों से पूरी तरह परिचित नहीं
होता। इसलिए उसे भविष्य सुंदर, आकर्षक और
संभावनाओं से भरा दिखाई देता है। अनुभव की कमी के कारण वह संसार को कल्पना के आधार
पर देखता है, वास्तविक संघर्ष के आधार पर
नहीं।
वाक्य 2
“मनुष्य जाति के
इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
भाव-विस्तार
समाज हमेशा परिवर्तनशील रहता है। हर समय में कुछ न कुछ दोष, अन्याय या अव्यवस्था पैदा होती है। इन्हें दूर करने के लिए
सुधार आवश्यक होते हैं। इसलिए समाज-सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
वाक्य 3
“आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न
देखेंगे।”
भाव-विस्तार
आज का युवा भविष्य को श्रेष्ठ मानता है, लेकिन जब वह वृद्ध होगा तो अपने ही बीते समय को सुंदर मानने लगेगा। इसका अर्थ
है कि समय बदलने के साथ व्यक्ति की दृष्टि भी बदल जाती है।
16. लेखन अभ्यास:
“दूर के ढोल सुहावने” पर छोटा निबंध
दूर से दिखाई देने वाली वस्तु अक्सर हमें सुंदर और आकर्षक लगती है, क्योंकि हम उसके वास्तविक पक्ष को नहीं जानते। यही बात “दूर
के ढोल सुहावने” लोकोक्ति में कही गई है। ढोल पास से बहुत तेज़ और कर्कश लग सकता
है, लेकिन दूर से वही ध्वनि
मधुर प्रतीत होती है। इसी प्रकार कई बार हमें दूसरों का जीवन, नौकरी, पद या सुविधा
बहुत अच्छी लगती है, पर उसके पीछे
की मेहनत, कठिनाई और संघर्ष हमें
दिखाई नहीं देते। इसलिए किसी भी वस्तु या स्थिति का सही मूल्यांकन निकट अनुभव के
आधार पर करना चाहिए, केवल दूर से
देखकर नहीं।
17. लेखन अभ्यास:
“समाज-सुधार” पर छोटा निबंध
समाज-सुधार का अर्थ है समाज में फैली बुराइयों, अन्याय और असमानताओं को दूर करना। समाज हमेशा बदलता रहता है, इसलिए सुधार की आवश्यकता भी हमेशा बनी रहती है। प्राचीन समय
से लेकर आज तक अनेक सुधारकों ने समाज को नई दिशा दी है। आज भी शिक्षा, पर्यावरण, लैंगिक समानता, दिव्यांगजन अधिकार, स्वच्छता और डिजिटल जागरूकता जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
समाज-सुधार केवल बड़े नेताओं का काम नहीं है; हर नागरिक अपने व्यवहार, सोच और
जिम्मेदारी से समाज को बेहतर बना सकता है।
18. अतिरिक्त MCQ Practice
1. “क्या लिखूँ?” पाठ की विधा क्या है?
क. कहानी
ख. कविता
ग. निबंध
घ. संस्मरण
उत्तर: ग. निबंध
2. लेखक को निबंध
किसके लिए लिखना था?
क. नमिता और अमिता के लिए
ख. गार्डिनर और मोंतेन के लिए
ग. शिक्षक और विद्यार्थी के लिए
घ. समाज-सुधारकों के लिए
उत्तर: क. नमिता और अमिता के लिए
3. निबंध के दो
मुख्य अंग कौन-से बताए गए हैं?
क. कथा और पात्र
ख. सामग्री और शैली
ग. छंद और रस
घ. संवाद और दृश्य
उत्तर: ख. सामग्री और शैली
4. “दूर के ढोल
सुहावने” में मुख्य भाव क्या है?
क. पास की चीज़ हमेशा सुंदर होती है
ख. दूर की चीज़ वास्तविकता से अलग आकर्षक लगती है
ग. ढोल हमेशा मधुर होता है
घ. विवाह में ढोल बजाना चाहिए
उत्तर: ख. दूर की चीज़ वास्तविकता से अलग आकर्षक लगती है
5. लेखक जीवन को
क्या मानते हैं?
क. स्थिर
ख. प्रगतिशील
ग. निरर्थक
घ. केवल अतीत-प्रधान
उत्तर: ख. प्रगतिशील
19. FAQs
1. “क्या लिखूँ?” पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक पदुमलाल
पुन्नालाल बख्शी हैं।
2. यह पाठ किस
विधा का है?
यह पाठ निबंध विधा का है।
3. पाठ का मुख्य
विषय क्या है?
मुख्य विषय है— निबंध लिखने की प्रक्रिया, लेखन की कठिनाई, अनुभव-आधारित
लेखन और समाज-सुधार।
4. लेखक को
कौन-कौन से विषयों पर निबंध लिखना था?
लेखक को “दूर के ढोल सुहावने” और “समाज-सुधार” पर निबंध लिखना था।
5. गार्डिनर के
अनुसार लेखन में क्या महत्त्वपूर्ण है?
गार्डिनर के अनुसार लेखन में लेखक की मानसिक स्थिति और मनोभाव सबसे
महत्त्वपूर्ण हैं।
6. मोंतेन की
पद्धति क्या है?
मोंतेन की पद्धति अनुभव-आधारित,
स्वच्छंद और आत्मपरक लेखन की पद्धति है।
7. अमीर खुसरो की
कहानी क्यों दी गई है?
यह कहानी कई विषयों को एक साथ जोड़कर रचना करने की प्रतिभा को दिखाने के लिए
दी गई है।
8. “दूर के ढोल
सुहावने” का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है— दूर की वस्तु या स्थिति वास्तविकता से अधिक आकर्षक लगती है।
9. लेखक के अनुसार
युवा और वृद्ध में क्या अंतर है?
युवा भविष्य को सुंदर मानते हैं,
जबकि वृद्ध अतीत को सुखद मानते हैं।
10. समाज-सुधार की
आवश्यकता क्यों रहती है?
क्योंकि समाज में समय के साथ नए दोष उत्पन्न होते हैं और उन्हें दूर करने के
लिए नए सुधार आवश्यक होते हैं।
11. पाठ में कौन-सा
व्याकरण भाग दिया गया है?
इस पाठ में मुख्य रूप से
समास, उपसर्ग-प्रत्यय, लोकोक्ति, भाव-विस्तार और शब्द-संपदा
से जुड़े अभ्यास दिए गए हैं।
12. इस पाठ से
विद्यार्थियों को क्या सीख मिलती है?
विद्यार्थियों को सीख मिलती है कि अच्छा लेखन अनुभव, विचार, शैली और स्पष्ट
अभिव्यक्ति से बनता है। साथ ही, किसी भी चीज़
को केवल दूर से देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
Comments
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